MDSU में रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों की बढ़ी मांग, एमए पॉपुलेशन स्टडीज़ और MSW में प्रवेश शुरू
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के जनसंख्या अध्ययन विभाग में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एम.ए. पॉपुलेशन स्टडीज़ और मास्टर ऑफ सोशल वर्क (MSW) पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि बदलते सामाजिक, स्वास्थ्य और विकास परिदृश्य में रोजगारोन्मुखी और शोध आधारित पाठ्यक्रमों की मांग लगातार बढ़ रही है।
विभागाध्यक्ष (प्रभारी) प्रो. सुब्रतो दत्ता ने बताया कि दोनों पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि सामाजिक शोध, नीति निर्माण, सामुदायिक विकास और रोजगार के क्षेत्र में व्यावहारिक दक्षता भी प्रदान करेंगे।
एमए पॉपुलेशन स्टडीज़ में जनसंख्या और डेटा विश्लेषण पर फोकस
प्रो. दत्ता ने बताया कि एम.ए. पॉपुलेशन स्टडीज़ दो वर्षीय पाठ्यक्रम है। इसमें प्रवेश के लिए स्नातक स्तर पर न्यूनतम 48 प्रतिशत अंक आवश्यक हैं। सामान्य वर्ग के लिए वार्षिक फीस 2200 रुपए तथा एससी, एसटी और महिला अभ्यर्थियों के लिए 1850 रुपए निर्धारित की गई है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जनसंख्या अध्ययन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, माइग्रेशन, परिवार कल्याण, सामाजिक सांख्यिकी और डेटा विश्लेषण जैसे विषयों का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। इस पाठ्यक्रम के बाद विद्यार्थियों के लिए सरकारी नीति निर्माण, जनगणना कार्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य, रिसर्च संस्थानों, एनजीओ, डेटा एनालिटिक्स और अकादमिक शोध जैसे क्षेत्रों में बेहतर अवसर उपलब्ध हैं।
MSW पाठ्यक्रम में सामाजिक नेतृत्व और फील्ड वर्क का प्रशिक्षण
जनसंख्या अध्ययन विभाग द्वारा संचालित मास्टर ऑफ सोशल वर्क (MSW) पाठ्यक्रम भी दो वर्षीय है। इसमें किसी भी विषय से स्नातक और न्यूनतम 48 प्रतिशत अंक प्राप्त विद्यार्थी प्रवेश ले सकते हैं।
इस पाठ्यक्रम की वार्षिक फीस सामान्य वर्ग के लिए 21,600 रुपए तथा एससी, एसटी और महिला अभ्यर्थियों के लिए 21,300 रुपए निर्धारित की गई है।
प्रो. दत्ता ने बताया कि MSW वर्तमान समय का एक प्रमुख प्रोफेशनल कोर्स बन चुका है। समाज में मानसिक स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण, सामाजिक न्याय, सामुदायिक विकास, काउंसलिंग सेवाएं और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि इस पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को सामाजिक नेतृत्व, फील्ड वर्क, सामुदायिक सहभागिता और मानव सेवा से जुड़ा व्यावहारिक अनुभव दिया जाता है।
रोजगार और शोध के क्षेत्र में मिलेंगे बेहतर अवसर
विभाग के अनुसार MSW पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद विद्यार्थी एनजीओ, मानसिक स्वास्थ्य एवं काउंसलिंग, मेडिकल एवं साइकियाट्रिक सोशल वर्क, सरकारी विभागों, कॉर्पोरेट CSR, शोध संस्थानों और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करियर बना सकते हैं।
प्रो. दत्ता ने कहा कि नई शिक्षा नीति और बदलती वैश्विक परिस्थितियों में ऐसे बहुआयामी पाठ्यक्रम युवाओं को संवेदनशील, शोधपरक और रोजगारोन्मुखी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को समाज की वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके समाधान में सक्रिय भागीदारी के लिए तैयार करना है।