रोज-रोज मोमो खाना पड़ सकता है भारी! जानिए शरीर को होने वाले बड़े नुकसान
आजकल बच्चों से लेकर युवाओं तक मोमो सबसे पसंदीदा स्ट्रीट फूड बन चुका है। बाजार, स्कूल-कॉलेज और हर गली-नुक्कड़ पर मोमो की दुकानों पर लोगों की भीड़ आसानी से देखी जा सकती है। गर्मागर्म मोमो और तीखी चटनी का स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोजाना मोमो खाना आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है?
दरअसल, बाजार में मिलने वाले ज्यादातर मोमो मैदे से बनाए जाते हैं। मैदे में फाइबर बहुत कम होता है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। लगातार ज्यादा मात्रा में मैदे का सेवन कब्ज, गैस और पेट फूलने जैसी परेशानियां बढ़ा सकता है।
इसके अलावा मोमो के साथ मिलने वाली तीखी लाल चटनी भी शरीर पर बुरा असर डाल सकती है। कई दुकानदार स्वाद बढ़ाने के लिए ज्यादा मिर्च और सस्ते मसालों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे एसिडिटी, पेट में जलन और अल्सर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क किनारे बिकने वाले मोमो में इस्तेमाल होने वाला तेल और सामग्री हमेशा अच्छी क्वालिटी की नहीं होती। कई बार बासी सब्जियां, खराब तेल और अस्वच्छ तरीके से तैयार खाना फूड पॉइजनिंग और पेट के इंफेक्शन का कारण बन सकता है।
नॉनवेज मोमो खाने वालों के लिए भी सावधानी जरूरी है। अगर चिकन या मीट सही तरीके से पकाया न जाए तो बैक्टीरियल इंफेक्शन और फूड जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
लगातार मोमो खाने से मोटापा बढ़ने का खतरा भी रहता है, क्योंकि इसमें कैलोरी और अनहेल्दी फैट की मात्रा अधिक हो सकती है। साथ ही शरीर को जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते।
विशेषज्ञों के अनुसार कभी-कभार सीमित मात्रा में मोमो खाना नुकसानदायक नहीं है, लेकिन इसे रोजाना की आदत बना लेना सेहत पर भारी पड़ सकता है। इसलिए स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।