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संतों की सुरक्षा को लेकर अजमेर में सकल जैन समाज का मौन जुलूस, सरकार से की कड़ी कार्रवाई की मांग

 

अजमेर। रीवा में दो आर्यिका माताजी के साथ हुई दुर्घटना और उनके देवलोक गमन के विरोध में सोमवार को सकल जैन समाज अजमेर के तत्वावधान में शहर में विशाल मौन जुलूस निकाला गया। समाज के लोगों ने संतों की सुरक्षा को लेकर रोष व्यक्त करते हुए केंद्र और राज्य सरकार से ठोस सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई।

मौन जुलूस सुबह 9 बजे डाक बंगला स्थित जिला परिषद के पास से शुरू हुआ, जिसमें सकल जैन समाज के विभिन्न घटकों के सैकड़ों लोग शामिल हुए। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए आगे बढ़ी। जैन समाज के लोगों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि पांच दिन पूर्व रीवा में दो आर्यिका माताजी के साथ हुई दुर्घटना में दोनों का देवलोक गमन हो गया था। इस घटना से पूरे देश के जैन समाज में आक्रोश है और उसी के विरोध में अजमेर में यह मौन जुलूस आयोजित किया गया।

रैली के माध्यम से प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के नाम ज्ञापन भेजकर संतों की सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाने की मांग की गई।

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने वीडियो कॉल के माध्यम से अजमेर जैन समाज के लोगों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि समाज की भावनाओं और मांगों को प्रधानमंत्री और गृहमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। अजमेर से बाहर होने के कारण देवनानी ने वीडियो कॉल के जरिए रैली को देखा और दुर्घटना में दिवंगत हुई दोनों आर्यिका माताजी के प्रति संवेदना व्यक्त की।

मौन जुलूस का नेतृत्व सकल जैन समाज के बैनर तले किया गया। कार्यक्रम में जैसवाल समाज के अध्यक्ष सुनील ढीलवारी ने कहा कि जैन समाज में गहरा आक्रोश है और सरकार को संतों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

रैली में अशोक छाजेड़, सुरेश खिवसरा, प्रदीप पाटनी, विक्रम पारख, शिखर चंद जैन, सुकांत जी, पुखराज पहाड़िया, डिप्टी मेयर नीरज जैन, बसंत सेठी, डॉ. आर.के. गोधा, अजय दनगसिया, मिश्रीलाल गदिया, राकेश घीया, नितिन जैन, गौरव जैन, प्रवीण जैन, दीपक चोपड़ा, कमल गंगवाल, अजय साहुला, अनूप पूर्णा सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।

सरकार से रखी गई प्रमुख मांगें

बड़ा धड़ा पंचायत के अध्यक्ष प्रदीप पाटनी ने बताया कि जैन समाज ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं।

  • घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच के लिए SIT या न्यायिक जांच कराई जाए।
  • घटना से जुड़े CCTV, वीडियो और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए।
  • दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
  • यदि घटना में किसी साजिश के तथ्य सामने आते हैं तो कठोर धाराएं लगाई जाएं।

इसके साथ ही समाज ने “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने की मांग की, जिसके तहत विहाररत साधु-संतों के मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय, पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

जैन समाज ने केंद्र सरकार से “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” बनाने की भी मांग की है, जिसमें पैदल विहार करने वाले संतों के लिए राष्ट्रीय गाइडलाइन और सुरक्षा SOP तैयार करने का प्रावधान हो। साथ ही संतों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में शामिल करने की मांग भी की गई।