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पुष्कर माहेश्वरी सेवा सदन विवाद: अदालत का बड़ा आदेश, संस्था में लागू रहेगा Status Quo

 

राजस्थान के Pushkar स्थित Shri Akhil Bharatiya Maheshwari Seva Sadan से जुड़े विवादित मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए संस्था में ‘यथास्थिति’ यानी Status Quo बनाए रखने के आदेश जारी किए हैं। अदालत के इस आदेश के बाद संस्था से जुड़े किसी भी पक्ष को अब नया नीतिगत, प्रशासनिक या वित्तीय फैसला लेने की अनुमति नहीं होगी।

माननीय जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश विक्रांत गुप्ता ने मामले की गंभीरता और कानूनी जटिलताओं को देखते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि संस्था की वर्तमान स्थिति में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा और सभी गतिविधियां यथास्थिति के दायरे में रहेंगी। इस फैसले को संस्था के भीतर चल रहे लंबे विवाद के बीच बेहद अहम माना जा रहा है।

मामले में अपीलार्थियों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विवेक पाराशर और हर्षित मित्तल ने बताया कि अदालत के इस आदेश के बाद वर्तमान प्रबंध कार्यकारिणी के अधिकार प्रभावी रूप से सीमित हो गए हैं। विशेष रूप से कार्यकारिणी द्वारा प्रस्तावित ‘अयोध्या भवन’ के लोकार्पण कार्यक्रम पर भी इस आदेश का सीधा असर पड़ा है और फिलहाल इस आयोजन पर रोक जैसी स्थिति बन गई है।

अधिवक्ताओं के अनुसार, अब संस्था की संपत्ति, बैंक खातों, नए निर्माण कार्यों और भविष्य के किसी भी कार्यक्रम पर वर्तमान कार्यकारिणी स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं ले सकेगी। अदालत ने दोनों पक्षों को किसी भी प्रकार की नई कार्रवाई से रोकते हुए अधीनस्थ न्यायालय का रिकॉर्ड भी तलब किया है।

यह आदेश मार्गदर्शक मंडल के वरिष्ठ सदस्यों राधा मोहन सोनी, हेमराज भराडिया, सोहनलाल भूतड़ा और रामकुमार मानधना द्वारा दायर याचिका तथा राहुल सोमानी और पंकज सोमानी की ओर से प्रस्तुत अपीलों पर सुनवाई के बाद आया है। ये अपीलें Pushkar न्यायालय के 16 अप्रैल 2026 के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई थीं।

अदालत के इस फैसले के बाद संस्था में प्रस्तावित 10 मई की बैठक और चुनावी गतिविधियों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। मार्गदर्शक मंडल से जुड़े सदस्यों का कहना है कि अदालत के आदेश के बाद किसी भी प्रकार का चुनावी प्रपंच, शक्ति प्रदर्शन या वित्तीय लेनदेन कानूनी रूप से प्रभावहीन हो गया है। उन्होंने इस फैसले को संस्था के हित में बड़ी कानूनी जीत बताया।

मार्गदर्शक मंडल के सदस्यों ने कहा कि अदालत का यह आदेश उन लोगों के लिए सख्त संदेश है जो संस्था को निजी संपत्ति की तरह संचालित करने का प्रयास कर रहे थे। उनका मानना है कि इस निर्णय से संस्था की पारदर्शिता और वैधानिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 19 मई 2026 को होगी। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में यह मामला संस्था के प्रशासनिक ढांचे और भविष्य की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है।

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