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अजमेर दरगाह विवाद: कोर्ट ने 12 में से 9 अर्जियां खारिज कीं, दरगाह दीवान और अंजुमन कमेटियां बनीं प्रतिवादी

 

राजस्थान के Ajmer स्थित Ajmer Sharif Dargah को लेकर चल रहे शिव मंदिर विवाद मामले में अजमेर पश्चिम की सिविल कोर्ट संख्या-1 ने अहम फैसला सुनाया है। दरगाह परिसर में शिव मंदिर होने के दावे से जुड़े इस मामले में पक्षकार बनने के लिए दायर 12 अर्जियों पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने केवल 3 अर्जियां स्वीकार की हैं, जबकि बाकी 9 अर्जियों को खारिज करते हुए संबंधित आवेदकों पर जुर्माना भी लगाया है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जिन 9 लोगों ने पक्षकार बनने के लिए आवेदन किया था, वे मामले से संबंधित पर्याप्त तथ्य और कानूनी आधार प्रस्तुत नहीं कर सके। इसे कोर्ट ने न्यायिक समय की बर्बादी माना और प्रत्येक अर्जी पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इस तरह कुल 2 लाख 70 हजार रुपये की राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

परिवादी पक्ष के वकील विजय शर्मा ने बताया कि इस मामले में महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज्यवर्धन सिंह परमार की अर्जी को वादी के रूप में स्वीकार किया गया है। वहीं, दरगाह से जुड़े प्रमुख पक्षकारों—दरगाह दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन और दोनों अंजुमन कमेटियों—को प्रतिवादी बनने की अनुमति दी गई है। अदालत ने माना कि ये सभी पक्ष सीधे तौर पर मामले से जुड़े हुए हैं, इसलिए इन्हें सुनवाई में शामिल किया जाना आवश्यक है।

इस मामले के मूल परिवादी हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता हैं, जिन्होंने दावा किया है कि अजमेर दरगाह परिसर में पहले शिव मंदिर था। हालांकि, कोर्ट के हालिया फैसले से वे पूरी तरह संतुष्ट नहीं बताए जा रहे हैं। उनके वकील के अनुसार, इस आदेश के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने पर विचार किया जा रहा है।

फैसले के बाद राज्यवर्धन सिंह परमार ने कोर्ट के निर्णय का सम्मान करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अदालत ने स्पष्ट किया है कि कई अर्जियां बिना तथ्यों के दाखिल की गई थीं। परमार ने दावा दोहराते हुए कहा कि “अजमेर में दरगाह नहीं, बल्कि भगवान शिव का मंदिर है” और उनकी संस्था इस मामले में कानूनी लड़ाई जारी रखेगी।

वहीं, दरगाह दीवान की ओर से वकील गुलाम नजमी फारुखी ने कहा कि अदालत ने दरगाह से जुड़े सभी महत्वपूर्ण स्टेकहोल्डर्स को पक्षकार बनाकर संतुलित फैसला दिया है। उन्होंने बताया कि अब मामले में कुल छह प्रतिवादी होंगे, जिनमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, दरगाह कमेटी, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, दरगाह दीवान और दोनों अंजुमन कमेटियां शामिल हैं।

इस मामले में अब दो वादी और छह प्रतिवादी अदालत में अपना-अपना पक्ष रखेंगे। अजमेर दरगाह विवाद को लेकर यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे आगे की कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई की दिशा तय होगी।

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