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लेबनान में इजरायल का ताजा हमला, तीन लोगों की मौत

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इजरायल ने एक बार फिर लेबनान में बड़ा हमला किया है। शनिवार को दक्षिण लेबनान के नबातीह जिले के मेफादौन कस्बे में एक रिहायशी इमारत को निशाना बनाया गया, जिसमें कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब क्षेत्र में शांति की कोशिशें जारी हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक बातचीत का दौर चल रहा है।

इस्लामाबाद वार्ता से पहले बढ़ा तनाव

यह हमला उस वक्त हुआ जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता शुरू होने वाली थी। इस बातचीत में स्थायी युद्धविराम को लेकर चर्चा की संभावना जताई जा रही थी। हालांकि, लेबनान पर जारी हमलों के कारण पहले ईरान ने इस वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया था, जिससे हालात और जटिल हो गए थे।

बाद में इजरायल की ओर से लेबनान के साथ बातचीत की इच्छा जताने के बाद ईरान ने अपना रुख बदला और वार्ता में शामिल होने के लिए सहमति दी। इससे यह साफ है कि क्षेत्रीय तनाव का सीधा असर कूटनीतिक प्रयासों पर पड़ रहा है।

सीजफायर को लेकर मतभेद

सीजफायर को लेकर अलग-अलग पक्षों के बीच मतभेद भी सामने आए हैं। ईरान का कहना है कि हाल ही में हुए दो हफ्तों के युद्धविराम में लेबनान भी शामिल था, जबकि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि उस समझौते में लेबनान शामिल नहीं था। इसी मतभेद के चलते क्षेत्र में शांति स्थापित करना और भी कठिन हो गया है।

14 अप्रैल से शुरू होगी सीधी बातचीत

इस बीच लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने जानकारी दी है कि इजरायल के साथ सीधी बातचीत 14 अप्रैल से शुरू हो सकती है। यह बातचीत वॉशिंगटन में आयोजित होने की संभावना है, जिसमें अमेरिका मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा।

इससे पहले दोनों देशों के राजदूतों ने भी आपसी संपर्क बढ़ाया है और बातचीत की शर्तों पर चर्चा की है। लेबनान की इच्छा है कि यह वार्ता किसी ठोस युद्धविराम के आधार पर हो, ताकि लंबे समय से जारी संघर्ष को खत्म किया जा सके।

लगातार हमलों से बढ़ा मानवीय संकट

इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच चल रहे संघर्ष ने लेबनान में गंभीर मानवीय संकट पैदा कर दिया है। 28 फरवरी से शुरू हुई इस जंग में अब तक करीब 1,900 लोगों की मौत हो चुकी है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, एक ही दिन में 300 से अधिक लोगों की मौत ने स्थिति को और भयावह बना दिया था।

हाल ही में नबातीह क्षेत्र में हुए एक हमले में सरकारी सुरक्षा कार्यालय के पास 13 अधिकारियों की भी मौत हो गई थी। इन लगातार हमलों ने आम नागरिकों के जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।

शांति की राह अभी कठिन

मध्य पूर्व में जारी यह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें कई वैश्विक शक्तियां भी शामिल हो चुकी हैं। ऐसे में शांति वार्ता के प्रयासों के बावजूद स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है। आने वाले दिनों में 14 अप्रैल को प्रस्तावित बातचीत से कुछ सकारात्मक परिणाम निकलने की उम्मीद जरूर जताई जा रही है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए स्थायी शांति की राह अभी भी चुनौतीपूर्ण नजर आती है।