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पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: अमित शाह के दौरे पर टीएमसी का तंज, सियासत तेज

पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज होती जा रही है। सभी प्रमुख दल चुनावी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं और नेताओं के बीच बयानबाजी भी लगातार बढ़ रही है। इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के राज्य दौरे को लेकर नई सियासी बहस छिड़ गई है।

अमित शाह का लंबा चुनावी दौरा

जानकारी के अनुसार अमित शाह आगामी दिनों में पश्चिम बंगाल में करीब 15 दिन तक रहकर चुनाव प्रचार करने वाले हैं। इस दौरान वह विभिन्न जिलों में जनसभाएं, पार्टी बैठकों और संगठनात्मक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। भारतीय जनता पार्टी इस दौरे को आगामी चुनावों के लिहाज से बेहद अहम मान रही है।

टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी का तंज

कल्याण बनर्जी ने अमित शाह के इस दौरे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह उनसे गुजारिश करते हैं कि इस बार वे केवल 15 दिन ही नहीं, बल्कि 4 मई तक पश्चिम बंगाल में ही रुकें। उनका यह बयान राजनीतिक व्यंग्य के रूप में देखा जा रहा है, जो चुनावी माहौल में बढ़ती तल्खी को दर्शाता है।

कल्याण बनर्जी ने यह भी दावा किया कि इस बार के चुनाव में अमित शाह को करारी हार का सामना करना पड़ेगा और उनका ‘चाणक्य’ वाला तमगा भी खत्म हो जाएगा। इस तरह के बयान से साफ है कि टीएमसी और भाजपा के बीच मुकाबला और तीखा होता जा रहा है।

आरोप-प्रत्यारोप का बढ़ता दौर

राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। नगरपालिका भर्ती भ्रष्टाचार मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा टीएमसी सांसद सुजीत बोस को समन भेजे जाने पर भी टीएमसी नेताओं ने सवाल उठाए हैं।

टीएमसी का आरोप है कि यह कार्रवाई चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक दबाव में की जा रही है और इसके पीछे केंद्र सरकार की भूमिका हो सकती है। हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

चुनाव से पहले गरमाती सियासत

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस तरह की बयानबाजी यह संकेत देती है कि आने वाले चुनाव बेहद प्रतिस्पर्धी होने वाले हैं। एक ओर भाजपा अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है, वहीं टीएमसी अपने जनाधार को बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

चुनाव नजदीक आते ही नेताओं के बीच जुबानी हमले और तेज होने की संभावना है, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा सकता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किस पार्टी पर भरोसा जताती है और 2026 के चुनाव में किसे जीत मिलती है।