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तेजस कार्यक्रम पर इंजन सप्लाई में देरी का असर

 

भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम तेजस को एक बार फिर झटका लगा है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने तेजस मार्क-1ए के लिए इंजन सप्लाई में हो रही देरी को लेकर अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस के खिलाफ नाराजगी जताई है और मुआवजे की मांग की है। यह मामला तब सामने आया जब तय समय के बावजूद इंजन की आपूर्ति पूरी नहीं हो सकी।

99 इंजन के ऑर्डर में भारी देरी

दरअसल, वर्ष 2021 में एचएएल ने जीई एयरोस्पेस को एफ404-आईएन20 इंजन के 99 यूनिट का ऑर्डर दिया था। लेकिन अब तक कंपनी ने केवल 6 इंजन ही उपलब्ध कराए हैं। इस देरी के कारण तेजस मार्क-1ए लड़ाकू विमानों के उत्पादन और डिलीवरी पर सीधा असर पड़ा है। एचएएल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डी.के. सुनील ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अनुबंध के तहत कंपनी ने मुआवजे की मांग की है।

सप्लाई चेन की चुनौतियां बनीं बड़ी वजह

डी.के. सुनील ने इंजन सप्लाई में देरी के पीछे वैश्विक सप्लाई चेन की समस्याओं को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी और उसके बाद उत्पन्न परिस्थितियों के कारण उत्पादन और आपूर्ति पर असर पड़ा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तेजस विमान का डिजाइन विशेष रूप से इस इंजन के अनुरूप किया गया है, इसलिए विकल्प सीमित हैं।

सुनील ने बताया कि एचएएल लगातार जीई एयरोस्पेस के संपर्क में है। कंपनी में नए प्रबंधन के आने और टेस्टिंग प्रक्रियाओं में ऑटोमेशन बढ़ने से स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई गई है। उन्होंने कहा कि जुलाई से दिसंबर के बीच लगभग 20 इंजन मिलने की संभावना है, जिससे उत्पादन में तेजी आ सकती है।

लड़ाकू विमानों की डिलीवरी में भी देरी

इंजन की कमी का असर सीधे तौर पर तेजस मार्क-1ए लड़ाकू विमानों की डिलीवरी पर पड़ा है। एचएएल के अनुसार, दिसंबर तक 20 से अधिक विमान तैयार हो सकते हैं, जिनमें से 6 विमानों की आपूर्ति जल्द की जा सकती है। फिलहाल इन विमानों के रडार, एवियोनिक्स और मिसाइल फायरिंग सिस्टम के अंतिम परीक्षण जारी हैं।

भारतीय वायु सेना द्वारा भी डिलीवरी में देरी को लेकर नाराजगी जताई जा चुकी है। तेजस के विभिन्न वेरिएंट—मार्क-1, मार्क-1ए, ट्रेनर और मार्क-2—पर काम चल रहा है, जिनमें मार्क-2 सबसे उन्नत संस्करण माना जा रहा है।

वायुसेना की जरूरत और स्क्वॉड्रन की कमी

वर्तमान सुरक्षा जरूरतों के अनुसार भारतीय वायु सेना को 42 फाइटर स्क्वॉड्रन की आवश्यकता है, जबकि फिलहाल उसके पास केवल 29 स्क्वॉड्रन ही मौजूद हैं। इस कमी को पूरा करने में तेजस कार्यक्रम की अहम भूमिका मानी जा रही है।

वायु सेना अब तक 40 में से 38 तेजस मार्क-1 विमान शामिल कर चुकी है। इसके अलावा 83 तेजस मार्क-1ए विमानों की डील एचएएल के साथ हुई थी, जिनसे चार स्क्वॉड्रन तैयार होने हैं। वहीं, 97 अतिरिक्त विमानों की खरीद से पांच और स्क्वॉड्रन बनेंगे। कुल मिलाकर तेजस के 11 स्क्वॉड्रन में से अभी केवल 2 ही शामिल हो पाए हैं।

दुर्घटना के बाद फिर उड़ान को तैयार तेजस बेड़ा

हाल ही में हुई एक दुर्घटना के बाद तेजस विमानों के पूरे बेड़े को अस्थायी रूप से उड़ान से रोक दिया गया था। फरवरी में एक विमान रनवे से आगे निकल गया था, जिसका कारण ब्रेक फेल होना माना गया। इस घटना के बाद व्यापक जांच की गई और सॉफ्टवेयर में पाई गई खामियों को दूर किया गया।

अब एचएएल ने जानकारी दी है कि 34 तेजस विमानों का बेड़ा 8 अप्रैल से दोबारा उड़ान भरने के लिए तैयार है। इससे वायुसेना की परिचालन क्षमता में फिर से सुधार होने की उम्मीद है।