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मिडिल ईस्ट संकट गहराया, ईरान के द्वीपों पर अमेरिका की नजर; ट्रंप की रणनीति से बढ़ा तनाव

 

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है और इसके थमने के फिलहाल कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका की रणनीति को लेकर नई चर्चाएं तेज हो गई हैं। पश्चिम एशिया में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती के बाद अब अमेरिका की नजर ईरान के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीपों पर टिक गई है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

ईरानी द्वीपों पर अमेरिका की बढ़ती नजर

फारस की खाड़ी में स्थित ईरान के कई द्वीप रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित अबू मूसा, ग्रेटर टुनब और लेसर टुनब द्वीप वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अहम भूमिका निभाते हैं। इन द्वीपों के पास से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस निर्यात होता है, इसलिए इन पर नियंत्रण किसी भी देश के लिए बड़ी सामरिक बढ़त साबित हो सकता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका इन द्वीपों पर संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर विचार कर रहा है। हालांकि यह कदम आसान नहीं माना जा रहा है, क्योंकि ईरान ने हाल ही में इन क्षेत्रों में मध्यम दूरी की मिसाइलें तैनात कर अपनी रक्षा मजबूत कर ली है।

यूएई का दावा और क्षेत्रीय विवाद

अबू मूसा, ग्रेटर टुनब और लेसर टुनब द्वीपों पर 1971 से ईरान का नियंत्रण है, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात लंबे समय से इन पर अपना दावा करता रहा है। ऐसे में अगर अमेरिका इन द्वीपों को लेकर कोई सैन्य कार्रवाई करता है, तो इससे यूएई की उम्मीदें भी बढ़ सकती हैं। यह विवाद पहले से ही क्षेत्रीय राजनीति का संवेदनशील मुद्दा रहा है।

अमेरिका की सैन्य तैयारियां और रणनीति

अमेरिकी समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन ईरान के खिलाफ कई सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है। इसमें इन द्वीपों पर कब्जा करने की रणनीति भी शामिल बताई जा रही है। अमेरिका ने क्षेत्र में करीब 5,000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की है, जिससे जमीनी हमले की आशंका को बल मिला है। खुद डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस संभावना से इनकार नहीं किया है।

ईरान की चेतावनी और कड़ी प्रतिक्रिया

ईरान ने भी इस संभावित खतरे को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मोहम्मद बाकेर ग़ालिबाफ ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी देश ने ईरान के द्वीपों पर कब्जा करने की कोशिश की, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान क्षेत्र में अमेरिका की हर गतिविधि पर नजर रखे हुए है।

खार्ग द्वीप पर हमले से बढ़ा तनाव

इससे पहले अमेरिका ने ईरान के महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप पर बड़ा सैन्य हमला किया था। डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए इसे मिडिल ईस्ट के इतिहास की सबसे शक्तिशाली बमबारी में से एक बताया था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि तेल बुनियादी ढांचे को नुकसान न पहुंचाने का फैसला मानवीय दृष्टिकोण से लिया गया।

खार्ग द्वीप ईरान के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहीं से उसके कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा निर्यात होता है। इस द्वीप पर किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है।

बढ़ते संघर्ष का वैश्विक असर

ईरान और इजरायल के बीच 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों ने पहले ही क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। इस संघर्ष में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है। अमेरिका की नई रणनीति और ईरान की चेतावनियों के बीच हालात और अधिक गंभीर होते नजर आ रहे हैं।