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विदेश मंत्री के ‘दलाल राष्ट्र’ बयान पर सियासी घमासान, अशोक गहलोत ने मांगी माफी

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें पाकिस्तान को ‘दलाल राष्ट्र’ बताया गया था। इस टिप्पणी को लेकर सियासत गरमा गई है और गहलोत ने इसे लेकर विदेश मंत्री से माफी की मांग की है।

गहलोत ने कहा कि यदि यह बयान ‘स्लिप ऑफ टंग’ के कारण आया है तो बात अलग हो सकती है, लेकिन विदेश मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति से इस तरह की भाषा की उम्मीद नहीं की जाती। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि शांति वार्ता में किसी देश की मध्यस्थता को ‘दलाली’ कहना पूरी तरह अनुचित है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में ऐसे प्रयास शांति स्थापित करने के लिए किए जाते हैं, न कि किसी प्रकार की दलाली के लिए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, को देखते हुए भारत सरकार को पहले से ही बेहतर तैयारी करनी चाहिए थी। उन्होंने राहुल गांधी का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही इस तरह की स्थिति को लेकर आगाह किया था, लेकिन सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए।

गहलोत ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि जब हालात बिगड़ जाते हैं, तब सरकार के पास उन्हें उचित ठहराने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को पहले से ऐसी रणनीति बनानी चाहिए थी, जिससे आम जनता को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े। उन्होंने कहा कि सरकार यह कह सकती थी कि वह लोगों को राहत देने और कठिनाइयों को कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन अब स्थिति नियंत्रण से बाहर जाती दिख रही है।

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में वह बयान है, जो सर्वदलीय बैठक के दौरान सामने आया। सूत्रों के अनुसार, बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए उसे ‘दलाल राष्ट्र’ बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मध्यस्थता कोई नई बात नहीं है और 1981 से अमेरिका द्वारा उसका इस्तेमाल किया जाता रहा है।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को जल्द समाप्त करने पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह युद्ध सभी पक्षों के लिए नुकसानदायक है और इसे जल्द खत्म होना चाहिए।

गहलोत ने अंत में कहा कि वर्तमान वैश्विक हालात बेहद अनिश्चित हैं और यह कहना मुश्किल है कि स्थिति आगे किस दिशा में जाएगी। ऐसे में सरकार को अधिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि विदेश मंत्री को अपने बयान पर माफी मांगनी चाहिए, ताकि देश की कूटनीतिक गरिमा बनी रहे।