News Image

राजस्थान में आरजीएचएस संकट पर तेज हुई सियासत

 

राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं और राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम को लेकर सियासत तेज हो गई है। कैशलेस दवा सुविधा बंद होने के बाद राज्य में लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की परेशानी बढ़ गई है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है और इसे जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर संकट बताया है।

टीकाराम जूली का सरकार पर हमला

कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब प्रदेश की जनता स्वास्थ्य संकट से जूझ रही है, तब सरकार को जमीनी हालात पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री के लगातार दिल्ली दौरों पर सवाल उठाते हुए इसे जनता के प्रति उदासीनता बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था चरमराने लगी है और अब यह स्थिति पतन की ओर बढ़ रही है। जूली के अनुसार, प्रदेश में दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हो रही है और इलाज की व्यवस्था भी बाधित हो रही है, जबकि सरकार केवल दावे और घोषणाएं कर रही है।

बकाया भुगतान के कारण बंद हुई कैशलेस सुविधा

इस पूरे संकट की मुख्य वजह आरजीएचएस के तहत बकाया भुगतान बताया जा रहा है। निजी अस्पतालों और दवा दुकानों का कहना है कि उन्हें कई महीनों से भुगतान नहीं मिला है, जिसके चलते उन्होंने कैशलेस दवा सुविधा बंद करने का निर्णय लिया है।

बताया जा रहा है कि कई मामलों में भुगतान में 7 से 9 महीने तक की देरी हो चुकी है। निजी संस्थानों ने पहले भी सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि समय पर भुगतान नहीं किया गया तो सेवाएं रोकनी पड़ेंगी, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

ओपीडी में कैशलेस दवाओं की सुविधा बंद

25 मार्च से ओपीडी में कैशलेस दवाओं की सुविधा पूरी तरह बंद कर दी गई है। इसका सीधा असर उन मरीजों पर पड़ा है, जो नियमित इलाज और दवाओं के लिए आरजीएचएस योजना पर निर्भर थे।

अब मरीजों को अपनी जेब से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ गया है। विशेष रूप से पेंशनर्स के लिए यह स्थिति बेहद कठिन हो गई है, क्योंकि उनकी आय सीमित होती है और वे इस योजना पर ज्यादा निर्भर रहते हैं।

सैकड़ों करोड़ का बकाया और बढ़ती समस्या

जानकारी के अनुसार, आरजीएचएस के तहत सैकड़ों करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। कुछ आकलनों में यह राशि 500 करोड़ रुपये से भी अधिक बताई जा रही है। जबकि नियमों के अनुसार अस्पतालों और फार्मेसी को 21 दिनों के भीतर भुगतान किया जाना चाहिए।

लंबे समय से भुगतान में देरी के कारण दवा सप्लाई और इलाज दोनों प्रभावित हो रहे हैं। यह संकट नया नहीं है, बल्कि पहले भी इस तरह की स्थिति सामने आ चुकी है। अगस्त 2025 में भी निजी अस्पतालों ने भुगतान न मिलने पर सेवाएं बंद करने की चेतावनी दी थी।

सरकार की कार्रवाई और प्रतिक्रिया

इस बीच राज्य सरकार ने आरजीएचएस में अनियमितताओं को लेकर कुछ डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इसमें निलंबन, एफआईआर दर्ज करना और रिकवरी जैसी कार्रवाई शामिल है।

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा है कि मामले की जानकारी ली जा रही है और जल्द समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस समस्या को गंभीरता से लेकर उचित कदम उठाएगी।