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मिडिल ईस्ट तनाव पर भारत की पूरी तैयारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में बताया रोडमैप

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर देश को विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में हालात लगातार चिंताजनक होते जा रहे हैं और इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। इस संघर्ष ने भारत के सामने आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय स्तर पर कई अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। हालांकि प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और देश में किसी भी प्रकार का ईंधन संकट नहीं होने दिया जाएगा।

भारतीयों की सुरक्षित वापसी और मिशनों की सक्रियता

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि संकट के बीच विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारतीय मिशन 24 घंटे सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं और विभिन्न स्थानों पर कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। अब तक तीन लाख से अधिक भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया जा चुका है। विशेष रूप से ईरान से लगभग एक हजार भारतीयों की वापसी कराई गई है, जिनमें 700 से अधिक युवा छात्र शामिल हैं। यह सरकार की त्वरित और संवेदनशील प्रतिक्रिया का प्रमाण है।

ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने की व्यापक रणनीति

प्रधानमंत्री ने बताया कि युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो गई है, जबकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। इसके बावजूद सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो।

उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। पहले जहां देश 27 देशों से ऊर्जा आयात करता था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 41 देशों तक पहुंच गई है। इसके साथ ही घरेलू उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे बाहरी निर्भरता कम हो सके।

रणनीतिक भंडारण और वैकल्पिक ऊर्जा पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश ने संकट की स्थिति से निपटने के लिए कच्चे तेल का पर्याप्त भंडारण किया है। वर्तमान में भारत के पास 53 मिलियन टन से अधिक का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व मौजूद है। इसके अलावा जहां से संभव हो, वहां से तेल और गैस की आपूर्ति जारी रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि पिछले वर्षों में इथेनॉल उत्पादन और उसकी ब्लेंडिंग पर विशेष ध्यान दिया गया है। आज पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जा रहा है, जिससे हर वर्ष करोड़ों बैरल कच्चे तेल के आयात में कमी आई है। इसके साथ ही रेलवे के विद्युतीकरण और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से भी ऊर्जा खपत को संतुलित करने में मदद मिली है।

सरकार की समन्वित कार्ययोजना

प्रधानमंत्री ने बताया कि इस संकट से निपटने के लिए एक इंटरमिनिस्ट्रीयल समूह का गठन किया गया है, जो रोजाना बैठक कर स्थिति की समीक्षा कर रहा है। यह समूह विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय स्थापित कर त्वरित निर्णय ले रहा है, ताकि देश पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव कम से कम पड़े।