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ईद-उल-फितर 2026: अलविदा जुमा की इबादत के बाद चांद रात में गुलजार हुए बाजार, आज मनाई जाएगी ईद

माह-ए-रमजान के मुकद्दस महीने के समापन के साथ ही देशभर में ईद-उल-फितर की खुशियां दस्तक दे चुकी हैं। शुक्रवार को रमजान के आखिरी जुमा, जिसे अलविदा जुमा कहा जाता है, के मौके पर मस्जिदों में भारी संख्या में नमाज अदा की गई। हजरत मुहम्मद की शिक्षाओं को याद करते हुए लोगों ने अमन, शांति, भाईचारे और मुहब्बत की दुआएं मांगीं। यह दिन पूरी तरह इबादत, तिलावत-ए-कुरआन और गुनाहों की माफी मांगने में गुजरा।

अलविदा जुमा पर उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़

शहर की सभी मस्जिदों में दोपहर 12:30 बजे से लेकर 2:30 बजे तक नमाज अदा की गई। रोजेदारों ने पूरे महीने की इबादत के बाद इस खास दिन अल्लाह का शुक्र अदा किया। घरों में महिलाओं ने भी नमाज, तस्बीह और कुरआन-ए-पाक की तिलावत कर दुआएं मांगीं। अलविदा जुमा के मौके पर माहौल ईद जैसा ही नजर आया, जहां हर ओर धार्मिक आस्था और समर्पण का दृश्य देखने को मिला।

चांद के दीदार के साथ ईद का ऐलान

शुक्रवार शाम रोजेदारों ने रमजान का अंतिम रोजा खोला और इसके बाद ईद के चांद का दीदार किया। चांद दिखाई देने के साथ ही ईद-उल-फितर का औपचारिक ऐलान कर दिया गया। उलमा किराम ने लोगों को मुबारकबाद दी और बताया कि ईद का त्योहार 21 मार्च को मनाया जाएगा। यह दिन अल्लाह की ओर से एक तोहफा माना जाता है, जो पूरे महीने की इबादत के बाद खुशियां लेकर आता है।

ईद की नमाज का समय और तैयारियां पूरी

ईद के दिन सुबह 7 बजे से शहर की विभिन्न ईदगाहों और मस्जिदों में नमाज अदा की जाएगी। आखिरी नमाज सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर अदा होगी। सभी मस्जिदों और ईदगाहों में साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। शहर के प्रमुख धार्मिक नेताओं और उलमा ने लोगों को ईद की मुबारकबाद देते हुए शांति और भाईचारे का संदेश दिया है।

चांद रात में बाजारों में उमड़ी भीड़

चांद रात के साथ ही बाजारों में रौनक चरम पर पहुंच गई। लोग देर रात तक खरीदारी में जुटे रहे और हर ओर खुशी का माहौल दिखाई दिया। सोशल मीडिया और मोबाइल के जरिए भी लोगों ने एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी। विदेशों में रह रहे परिजनों ने भी अपने परिवारों से संपर्क कर इस खुशी में हिस्सा लिया।

शहर के प्रमुख बाजारों में देर रात तक भीड़ बनी रही। कपड़ों, जूते-चप्पल, इत्र, टोपी और बच्चों के सामान की दुकानों पर खासा उत्साह देखा गया। महिलाओं की भीड़ चूड़ी, ज्वैलरी, मेकअप और अन्य जरूरी सामान की दुकानों पर नजर आई। दुकानदारों ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए विशेष छूट भी दी, जिससे खरीदारी का उत्साह और बढ़ गया।

इबादत और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश

चांद रात को लोग इबादत में भी लीन नजर आए। मस्जिदों में एतिकाफ पर बैठे रोजेदारों ने अल्लाह का शुक्र अदा किया और दुआएं मांगीं। इस दौरान सदका-ए-फित्र और जकात देने का सिलसिला भी जारी रहा, ताकि जरूरतमंद लोग भी ईद की खुशियों में शामिल हो सकें।

धार्मिक विद्वानों ने इस अवसर पर समाज में समानता और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ईद-उल-फितर केवल खुशियां मनाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह समाज में एकता और सहयोग की भावना को मजबूत करने का अवसर भी है। जकात और फित्रा के माध्यम से गरीबों की मदद करना इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

रमजान से मिली सीख को जीवन में अपनाने की अपील

उलमा ने लोगों से अपील की कि रमजान के दौरान जो अनुशासन और इबादत का सिलसिला अपनाया गया, उसे पूरे साल जारी रखा जाए। उन्होंने कहा कि नमाज, नेक काम और दूसरों के प्रति अच्छा व्यवहार जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।

कुल मिलाकर, ईद-उल-फितर 2026 का त्योहार आस्था, खुशियों और सामाजिक समरसता का संदेश लेकर आया है। अलविदा जुमा की इबादत और चांद रात की रौनक के बाद अब पूरा शहर ईद के इस्तकबाल के लिए तैयार है, जहां हर चेहरे पर खुशी और दिलों में मुहब्बत की भावना दिखाई दे रही है।