बॉलीवुड के ‘धुरंधर’ रणवीर सिंह और पाकिस्तान से जुड़ा पारिवारिक इतिहास
बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह की हालिया रिलीज फिल्म धुरंधर पार्ट-2 इन दिनों चर्चा में बनी हुई है। इस फिल्म में रणवीर सिंह एक भारतीय जासूस की भूमिका निभा रहे हैं, जो पाकिस्तान में ‘हमजा अली मजारी’ बनकर रहता है। फिल्म का एक खास सीन दर्शकों का ध्यान खींच रहा है, जिसमें वह खुद को क्वेटा के खरोटाबाद का निवासी बताते हैं। दिलचस्प बात यह है कि पर्दे पर निभाया गया यह किरदार केवल एक अभिनय नहीं है, बल्कि कहीं न कहीं रणवीर सिंह के असल पारिवारिक इतिहास से भी जुड़ा हुआ है। उनके पूर्वजों की जड़ें उस क्षेत्र से जुड़ी हैं, जो आज पाकिस्तान का हिस्सा है।
विभाजन से पहले का इतिहास और बर्क परिवार
रणवीर सिंह के परिवार का इतिहास हमें 1940 के दशक के उस दौर में ले जाता है, जब भारत और पाकिस्तान एक ही देश थे। उस समय अविभाजित पंजाब के ननकाना साहब के पास मार्टिनपुर नाम का एक गांव था, जहां बर्क परिवार रहता था। यह परिवार ईसाई धर्म का पालन करता था और इसके मुखिया खैरूद्दीन अपनी शायरी के लिए ‘बर्क’ उपनाम का इस्तेमाल करते थे। इसी परिवार से दो महत्वपूर्ण शख्सियतें उभरीं—सैम्युल मार्टिन बर्क और उनकी बहन चांद बर्क। इन दोनों ने अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई।
सैम्युल मार्टिन बर्क: न्यायपालिका से कूटनीति तक का सफर
सैम्युल मार्टिन बर्क का जन्म 1906 में हुआ था और वे भारतीय सिविल सेवा (ICS) के प्रतिष्ठित अधिकारी थे। उन्होंने न्यायाधीश के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। 1946 में जब पंजाब में चुनावी याचिकाओं के निपटारे के लिए एक आयोग बना, तो सैम्युल उसके चेयरमैन नियुक्त किए गए। उस समय राजनीतिक परिस्थितियां बेहद संवेदनशील थीं और उन पर निष्पक्षता बनाए रखने का दबाव था। उन्होंने किसी एक पक्ष का समर्थन करने के बजाय समय से पहले रिटायरमेंट लेना उचित समझा और इंग्लैंड चले गए।
बाद में पाकिस्तान के पहले विदेश मंत्री के आग्रह पर उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे कई देशों में पाकिस्तान के राजदूत रहे और लंदन में पाकिस्तानी दूतावास की स्थापना में भी उनका योगदान रहा। उनका जीवन 103 वर्ष की आयु तक रहा और उन्हें एक अनुभवी प्रशासक और कूटनीतिज्ञ के रूप में याद किया जाता है।
चांद बर्क: लाहौर से मुंबई तक का सफर
रणवीर सिंह की दादी चांद बर्क अपने समय की मशहूर अभिनेत्री और डांसर थीं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत लाहौर से की थी और उन्हें ‘डांसिंग लिली ऑफ पंजाब’ के नाम से जाना जाता था। विभाजन के बाद वह मुंबई आ गईं, लेकिन शुरुआती दौर में उन्हें काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा। बाद में फिल्म निर्माता राज कपूर ने उन्हें फिल्मों में वापसी का मौका दिया, जिससे उन्हें नई पहचान मिली।
फिल्म ‘बूट पालिश’ से मिली पहचान
चांद बर्क को फिल्म बूट पालिश में निभाए गए उनके किरदार के लिए खास तौर पर याद किया जाता है। इस फिल्म में उन्होंने एक कठोर और निर्दयी महिला का रोल निभाया था, जो अनाथ बच्चों के साथ बुरा व्यवहार करती है। उनकी दमदार अदाकारी ने दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा और यह किरदार उनके करियर का सबसे यादगार हिस्सा बन गया।
रणवीर सिंह: विरासत और वर्तमान का संगम
चांद बर्क ने बाद में सुंदर सिंह भवनानी से शादी की। उनके बेटे जगजीत सिंह भवनानी, रणवीर सिंह के पिता हैं। इस तरह रणवीर सिंह उस बर्क परिवार की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, जिसकी जड़ें भारत-पाकिस्तान के साझा इतिहास में गहराई से जुड़ी हुई हैं।
इतिहास और सिनेमा का अनोखा मेल
रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर पार्ट-2 में निभाया गया किरदार और उनका असली पारिवारिक इतिहास एक दिलचस्प समानता प्रस्तुत करता है। यह केवल एक फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि इतिहास, विरासत और पहचान का ऐसा संगम है, जो दर्शकों को अतीत से जोड़ता है। रणवीर सिंह आज भले ही भारतीय सिनेमा के चमकते सितारे हों, लेकिन उनकी जड़ें उस दौर की याद दिलाती हैं, जब सीमाएं नहीं थीं और पहचानें साझा थीं।