चैत्र नवरात्रि 2026: अष्टमी और नवमी की तिथि, पूजा मुहूर्त और कन्या पूजन का महत्व
हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व होता है। यह नौ दिनों का पावन पर्व मां दुर्गा की आराधना के लिए समर्पित होता है, जिसमें भक्त व्रत, पूजा और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है, जिसके पहले दिन घटस्थापना के साथ इस पर्व का शुभारंभ होगा।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06:52 से 07:43 तक रहेगा। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07 से 12:55 तक रहेगा। इसी शुभ समय में कलश स्थापना कर मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है।
अष्टमी तिथि और पूजा का समय
नवरात्रि की अष्टमी तिथि को अत्यंत फलदायी माना गया है। वर्ष 2026 में अष्टमी 26 मार्च को मनाई जाएगी। अष्टमी तिथि 25 मार्च को दोपहर 1:50 बजे शुरू होकर 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे समाप्त होगी। इस दिन पूजा के लिए सुबह 6:20 से 7:52 तक पहला शुभ मुहूर्त रहेगा। इसके अलावा दूसरा मुहूर्त सुबह 10:56 से दोपहर 2:01 तक और शाम का मुहूर्त 5:06 से रात 9:33 तक रहेगा।
अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। उन्हें सौभाग्य और विवाह की देवी माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पूजा करने से अविवाहित कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है, जबकि विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।
नवमी तिथि और पूजा विधि
नवरात्रि का अंतिम दिन नवमी कहलाता है, जो 27 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे शुरू होकर 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे समाप्त होगी। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:18 से 10:56 तक रहेगा।
नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी आराधना से बुद्धि, विवेक और ज्ञान में वृद्धि होती है। साथ ही साधना करने वाले भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
कन्या पूजन का विशेष महत्व
चैत्र नवरात्रि में अष्टमी और नवमी दोनों दिन कन्या पूजन के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। इस परंपरा में छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। उन्हें भोजन कराना और सम्मान देना धार्मिक दृष्टि से बहुत पुण्यकारी माना जाता है।
शास्त्रों में भी कहा गया है कि जहां कन्याओं का सम्मान होता है, वहां देवी स्वयं प्रसन्न होकर अपने भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसलिए इन दोनों दिनों में श्रद्धा और विधि-विधान से कन्या पूजन करना विशेष फलदायी होता है।
डिसक्लेमर: यहाँ मोहैया सूचना सामान्य मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है Swami News यहाँ दी गई जानकारी की सत्यता दावा नहीं करता।