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अयोध्या में ऐतिहासिक क्षण: राम मंदिर में स्थापित होगा श्रीराम यंत्र

 

उत्तर प्रदेश के पावन नगरी अयोध्या में आज का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के शुभ अवसर पर राम मंदिर में स्वर्ण निर्मित ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना होने जा रही है। यह आयोजन देश के लिए एक ऐतिहासिक पल के रूप में देखा जा रहा है, जो आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक बनेगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी स्थापना

इस विशेष अवसर पर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं राम मंदिर पहुंचकर ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना करेंगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सुबह 11:55 बजे मंदिर के शिखर तल पर इस यंत्र को विधिवत स्थापित किया जाएगा। इससे पहले राष्ट्रपति मंदिर में विराजमान रामलला के दर्शन करेंगी और पूजा-अर्चना के विभिन्न अनुष्ठानों में भाग लेंगी।

वैदिक अनुष्ठानों के बाद पूर्णाहुति

‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना से पहले आठ दिनों तक विशेष वैदिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। ‘श्री सीताराम राम जानकी यज्ञ’ के रूप में चले इस धार्मिक आयोजन का आज पूर्णाहुति के साथ समापन हुआ। पूरे अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति का वातावरण अयोध्या में देखने को मिला, जिससे श्रद्धालुओं में उत्साह और श्रद्धा का संचार हुआ।

शंकराचार्य परंपरा से जुड़ा विशेष यंत्र

यह स्वर्ण निर्मित ‘श्रीराम यंत्र’ आदि गुरु आदि शंकराचार्य की परंपरा से जुड़े वर्तमान शंकराचार्यों द्वारा विशेष रूप से भेजा गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस यंत्र की स्थापना से मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा और अधिक प्रबल होती है और यह पूरे वातावरण में सकारात्मकता का संचार करता है।

विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

इस भव्य आयोजन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। इन सभी की मौजूदगी इस कार्यक्रम को और अधिक महत्वपूर्ण बना रही है।

सुरक्षा और तैयारियों का विशेष ध्यान

कार्यक्रम को लेकर अयोध्या में व्यापक तैयारियां की गई हैं। पूरे शहर को सजाया गया है और सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने मिलकर यह सुनिश्चित किया है कि आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो।

आस्था और एकता का प्रतीक

‘श्रीराम यंत्र’ को केवल एक धार्मिक संरचना नहीं, बल्कि देश की एकता, आस्था और विश्व कल्याण के संकल्प का प्रतीक माना जा रहा है। इस यंत्र की स्थापना के साथ अयोध्या से पूरे विश्व को शांति, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है।