सारा अली खान को बद्रीनाथ-केदारनाथ में प्रवेश से पहले देना होगा आस्था का हलफनामा, जानें पूरा मामला
बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान एक बार फिर धार्मिक आस्था को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में उनकी उत्तराखंड स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थलों बद्रीनाथ मंदिर और केदारनाथ मंदिर की यात्रा को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर समिति ने एक नया नियम लागू किया है, जिसके तहत गैर-हिंदू श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश से पहले आस्था का शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा।
मंदिर समिति का नया नियम
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने 17 मार्च को जानकारी दी कि अब मंदिर में दर्शन करने के इच्छुक सभी गैर-हिंदू व्यक्तियों को हिंदू धर्म में अपनी आस्था का प्रमाण देना होगा। इसके लिए उन्हें एक शपथ पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। यह नियम आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ वीआईपी और चर्चित हस्तियों पर भी समान रूप से लागू किया गया है। समिति का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य मंदिर की परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं को बनाए रखना है।
सारा अली खान पर क्यों लागू होगा यह नियम
सारा अली खान के पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए यह नियम उन पर भी लागू होता है। उनके पिता सैफ अली खान मुस्लिम हैं, जबकि उनकी माता अमृता सिंह सिख धर्म से संबंध रखती हैं। ऐसे में उन्हें मंदिर में प्रवेश के लिए अपनी आस्था को लेकर औपचारिक रूप से हलफनामा देना होगा। समिति के अनुसार, यदि सारा सनातन धर्म के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करती हैं और आवश्यक दस्तावेज जमा करती हैं, तो उन्हें मंदिर में पूजा-अर्चना की अनुमति मिल जाएगी।
बद्रीनाथ-केदारनाथ से सारा का खास जुड़ाव
सारा अली खान का बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों से गहरा भावनात्मक संबंध रहा है। उन्होंने वर्ष 2018 में फिल्म केदारनाथ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी, जिसमें उनके साथ सुशांत सिंह राजपूत नजर आए थे। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान ही उनका इन धार्मिक स्थलों से जुड़ाव शुरू हुआ, जो आज तक कायम है।
सारा वर्ष 2017 से लगातार इन मंदिरों की यात्रा करती आ रही हैं। हर साल अप्रैल से नवंबर के बीच वह उत्तराखंड जाकर दर्शन करती हैं। उनकी यह यात्राएं किसी फिल्म या प्रमोशन का हिस्सा नहीं होतीं, बल्कि पूरी तरह निजी और आध्यात्मिक होती हैं।
सोशल मीडिया पर धार्मिक यात्राओं की झलक
सारा अली खान अक्सर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इन धार्मिक यात्राओं की तस्वीरें और वीडियो साझा करती रहती हैं। इनमें हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए की गई ट्रैकिंग और हेलीकॉप्टर यात्रा भी शामिल होती है। करीब 3583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ मंदिर तक पहुंचना अपने आप में एक कठिन और आध्यात्मिक अनुभव माना जाता है।
इन यात्राओं के दौरान सारा मंदिर में सुबह के दर्शन करती हैं, पूजा-अर्चना में भाग लेती हैं और प्रसाद चढ़ाती हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि उनकी इन स्थलों के प्रति गहरी श्रद्धा और आस्था है।
धार्मिक परंपराओं और आधुनिकता के बीच संतुलन
यह नया नियम धार्मिक परंपराओं को बनाए रखने और उनकी मर्यादा को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है। हालांकि, इस पर समाज के विभिन्न वर्गों में चर्चा भी हो रही है कि आधुनिक समय में धार्मिक स्थलों पर इस प्रकार के नियम किस हद तक उचित हैं।