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10 साल के बच्चों का वैक्सीनेशन क्यों है जरूरी, जानिए कौन-सी वैक्सीन लगवाना नहीं भूलना चाहिए

हर साल 16 मार्च को राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों में टीकाकरण के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाना और बच्चों को समय पर जरूरी टीके लगवाने के लिए प्रेरित करना है। आमतौर पर कई माता-पिता यह मान लेते हैं कि छोटे बच्चों को शुरुआती वर्षों में टीके लगवाने के बाद आगे वैक्सीन की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों की बढ़ती उम्र के साथ-साथ कुछ बूस्टर टीकों की जरूरत भी होती है, ताकि पहले लगाए गए टीकों से बनी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे।

डॉक्टरों का कहना है कि जब बच्चा लगभग 10 साल का हो जाता है, तब भी उसे कुछ जरूरी वैक्सीन लगवाना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इससे बच्चे को कई गंभीर बीमारियों से सुरक्षा मिलती है और भविष्य में संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।

टीकाकरण का उद्देश्य और महत्व

टीकाकरण किसी भी व्यक्ति के शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। बचपन में दिए गए टीके कई खतरनाक बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं, लेकिन समय के साथ उनकी प्रभावशीलता कम हो सकती है। यही कारण है कि कुछ बीमारियों से बचाव के लिए समय-समय पर बूस्टर डोज लगवाना जरूरी होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि बच्चों को सही समय पर टीके नहीं लगते हैं तो वे संक्रमण और गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। इसलिए माता-पिता को बच्चों का टीकाकरण कार्ड सुरक्षित रखना चाहिए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार सभी जरूरी टीके लगवाने चाहिए।

टेटनस और डिप्थीरिया से बचाव के लिए टीडी वैक्सीन

10 साल की उम्र में बच्चों को टीडी वैक्सीन का बूस्टर डोज दिया जाता है। यह टीका दो खतरनाक बीमारियों टेटनस और डिप्थीरिया से सुरक्षा प्रदान करता है।

टेटनस एक गंभीर संक्रमण है जो अक्सर किसी गहरी चोट या जंग लगी वस्तु से घाव होने के बाद हो सकता है। वहीं डिप्थीरिया एक संक्रामक बीमारी है जो गले और श्वसन तंत्र को प्रभावित करती है। इस वैक्सीन का बूस्टर डोज लगवाने से शरीर में पहले से बनी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहती है।

टायफॉयड से सुरक्षा के लिए बूस्टर टीका

टायफॉयड बुखार एक बैक्टीरियल संक्रमण है जो दूषित भोजन या पानी के जरिए फैलता है। यदि बच्चे को पहले टायफॉयड का टीका लग चुका है तो लगभग 3 से 5 साल बाद इसका बूस्टर डोज लगवाना जरूरी होता है।

डॉक्टरों के अनुसार टायफॉयड का बूस्टर टीका लगवाने से बच्चे को भविष्य में इस बीमारी के खतरे से काफी हद तक सुरक्षा मिलती है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां स्वच्छता और पानी की गुणवत्ता पूरी तरह सुनिश्चित नहीं होती, वहां यह टीका और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।

फ्लू से बचाव के लिए इन्फ्लुएंजा वैक्सीन

बहुत से माता-पिता बच्चों को फ्लू या इन्फ्लुएंजा की वैक्सीन नहीं लगवाते, जबकि यह टीका भी बच्चों के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। इन्फ्लुएंजा वैक्सीन बच्चों को मौसमी फ्लू से बचाने में मदद करती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लू वायरस हर साल बदलता रहता है, इसलिए इसकी वैक्सीन भी हर साल लगवाना फायदेमंद होता है। इससे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है और वे संक्रमण से जल्दी प्रभावित नहीं होते।

डॉक्टर की सलाह से पूरा करें टीकाकरण

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के टीकाकरण को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। यदि बच्चा 10 साल का हो चुका है तो माता-पिता को उसका टीकाकरण कार्ड डॉक्टर को दिखाकर जरूरी बूस्टर टीकों के बारे में जानकारी लेनी चाहिए।

समय पर टीकाकरण कराने से न केवल बच्चे का स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है, बल्कि समाज में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी कम हो जाता है। यही कारण है कि राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस के अवसर पर लोगों को टीकों के महत्व के बारे में जागरूक किया जाता है, ताकि हर बच्चा स्वस्थ और सुरक्षित जीवन जी सके।