राजस्थान के टीएसपी क्षेत्रों में आरक्षण को लेकर बढ़ी मांग, विजय बैंसला ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
राजस्थान में आरक्षण व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इस बार मामला राज्य के ट्राइबल सब प्लान यानी टीएसपी क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने राज्य सरकार से मांग की है कि टीएसपी क्षेत्रों में भी अन्य पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को आरक्षण का लाभ दिया जाए। इस संबंध में समिति के अध्यक्ष विजय बैंसला ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर तुरंत निर्णय लेने की मांग की है।
वर्तमान आरक्षण नीति पर उठाए सवाल
समिति की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मौजूदा आरक्षण नीति के कारण टीएसपी क्षेत्रों में रहने वाले एमबीसी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के युवाओं को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। समिति का कहना है कि इस व्यवस्था के चलते इन वर्गों के युवाओं को अवसरों में असमानता का सामना करना पड़ रहा है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्तमान नीति के कारण कई योग्य उम्मीदवार सरकारी भर्तियों में पिछड़ रहे हैं। समिति का तर्क है कि यदि राज्य के अन्य हिस्सों में इन वर्गों को आरक्षण का लाभ मिल रहा है, तो टीएसपी क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को इससे वंचित रखना उचित नहीं है।
संविधान के अनुच्छेदों का दिया गया हवाला
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने अपने पत्र में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 का हवाला देते हुए कहा है कि किसी भी नागरिक के साथ जन्म स्थान या निवास के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। समिति का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था इन संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है, क्योंकि इससे एक ही राज्य के भीतर अलग-अलग सामाजिक स्थिति पैदा हो रही है।
समिति का तर्क है कि जब राज्य के गैर-टीएसपी क्षेत्रों में विभिन्न वर्गों को आरक्षण का लाभ मिल रहा है, तो टीएसपी क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को केवल उनके निवास स्थान के आधार पर इससे वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
टीएसपी और गैर-टीएसपी क्षेत्रों में आरक्षण का अंतर
पत्र में यह भी बताया गया है कि राज्य के गैर-टीएसपी क्षेत्रों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को मिलाकर लगभग 64 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है। वहीं टीएसपी क्षेत्रों में 50 प्रतिशत आरक्षण केवल अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए निर्धारित है, जबकि शेष 50 प्रतिशत सीटें अनारक्षित रहती हैं।
इस व्यवस्था के कारण एमबीसी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के युवाओं को प्रतिस्पर्धा में बराबरी का मौका नहीं मिल पाता। समिति का कहना है कि इससे क्षेत्रीय असमानता पैदा हो रही है और कई प्रतिभाशाली युवाओं को अवसरों से वंचित होना पड़ रहा है।
क्षेत्रीय असमानता दूर करने की मांग
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि टीएसपी क्षेत्रों में होने वाली सभी आगामी भर्तियों और शैक्षणिक प्रवेश प्रक्रियाओं में एमबीसी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए भी आरक्षण लागू किया जाए। समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि इन वर्गों को वही लाभ दिया जाए जो राज्य के गैर-टीएसपी क्षेत्रों में पहले से लागू हैं।
पत्र में उम्मीद जताई गई है कि राज्य सरकार इस लंबे समय से चली आ रही विसंगति को दूर करने के लिए सकारात्मक कदम उठाएगी। समिति का कहना है कि सरकार यदि इस मुद्दे पर संवैधानिक समानता के सिद्धांतों के अनुरूप निर्णय लेती है, तो इससे राज्य के हजारों युवाओं को समान अवसर मिल सकेंगे और क्षेत्रीय असमानता भी कम होगी।