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शरीर में विटामिन ‘डी’ की कमी कितनी खतरनाक, इससे बढ़ सकता है कई बीमारियों का खतरा

 

स्वस्थ शरीर के लिए संतुलित आहार और पर्याप्त पोषण बेहद जरूरी होता है। इन्हीं आवश्यक पोषक तत्वों में से एक है विटामिन ‘डी’, जिसे अक्सर ‘सनशाइन विटामिन’ कहा जाता है। इसका सबसे बड़ा स्रोत सूर्य की रोशनी है। जब शरीर को पर्याप्त धूप मिलती है तो त्वचा में मौजूद कोशिकाएं विटामिन ‘डी’ का निर्माण करती हैं। पिछले कुछ वर्षों में यह विषय काफी चर्चा में रहा है कि शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए विटामिन ‘डी’ की कितनी मात्रा आवश्यक होती है और इसकी कमी होने पर शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह विटामिन शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक है और इसकी कमी होने पर कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

विटामिन ‘डी’ शरीर के लिए क्यों जरूरी है

विटामिन ‘डी’ शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ये दोनों खनिज हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी होते हैं। जब शरीर में विटामिन ‘डी’ की पर्याप्त मात्रा होती है, तो कैल्शियम सही तरीके से अवशोषित होता है और हड्डियां मजबूत बनी रहती हैं। लेकिन यदि शरीर में इसकी कमी हो जाए, तो कैल्शियम का अवशोषण ठीक से नहीं हो पाता और हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। इसके अलावा यह विटामिन मांसपेशियों की कार्यक्षमता, प्रतिरक्षा प्रणाली और शरीर की समग्र सेहत को बनाए रखने में भी मदद करता है।

किन लोगों में अधिक देखी जाती है इसकी कमी

स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी देने वाली संस्था ‘येल मेडिसिन’ के अनुसार विटामिन ‘डी’ की कमी किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक यह समस्या देखी जाती है। खासतौर पर वे बच्चे जो केवल स्तनपान पर निर्भर रहते हैं, उन्हें मां के दूध से पर्याप्त मात्रा में विटामिन ‘डी’ नहीं मिल पाता। ऐसे में कई बार डॉक्टर बच्चों को विटामिन ‘डी’ के सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं। वहीं बढ़ती उम्र के साथ त्वचा की वह क्षमता कम हो जाती है, जिससे शरीर सूर्य की रोशनी से विटामिन ‘डी’ बना सके। इस कारण बुजुर्गों में भी इसकी कमी अधिक देखी जाती है।

विटामिन ‘डी’ की कमी के लक्षण

जब शरीर में विटामिन ‘डी’ का स्तर कम हो जाता है, तो कई प्रकार के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। सबसे सामान्य लक्षणों में हड्डियों में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी और लगातार थकान महसूस होना शामिल है। कई लोगों को मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या भी हो सकती है। कुछ मामलों में हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन का अनुभव भी होता है। यदि यह कमी लंबे समय तक बनी रहे, तो हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। विशेष रूप से बुजुर्गों में विटामिन ‘डी’ की कमी गिरने और हड्डी टूटने की आशंका को बढ़ा सकती है।

विटामिन ‘डी’ की कमी के कारण

विटामिन ‘डी’ की कमी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सबसे प्रमुख कारण धूप में पर्याप्त समय न बिताना है। इसके अलावा संतुलित आहार की कमी, गहरे रंग की त्वचा, कुछ प्रकार की दवाइयों का लंबे समय तक सेवन तथा किडनी और लिवर से जुड़ी बीमारियां भी शरीर में विटामिन ‘डी’ के स्तर को प्रभावित कर सकती हैं। कुछ मामलों में यह समस्या आनुवंशिक कारणों से भी हो सकती है।

कैसे बनाए रखें विटामिन ‘डी’ का सही स्तर

विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर में विटामिन ‘डी’ का स्तर बनाए रखने के लिए रोजाना कुछ समय धूप में रहना जरूरी है। इसके साथ ही संतुलित और पौष्टिक आहार लेना भी महत्वपूर्ण है। जिन लोगों में इसकी कमी अधिक होती है, उन्हें डॉक्टर की सलाह से विटामिन ‘डी’ के सप्लीमेंट भी दिए जाते हैं। सही जीवनशैली, संतुलित भोजन और नियमित धूप से शरीर में इस महत्वपूर्ण विटामिन की कमी को काफी हद तक रोका जा सकता है।