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राजस्थान में वर्ष 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन

देशभर में लंबित मामलों के त्वरित और सरल निपटारे के उद्देश्य से वर्ष 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन शनिवार को किया गया। राजस्थान में इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन का औपचारिक शुभारंभ राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ के नए भवन में हुआ। इस कार्यक्रम का उद्घाटन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने किया।

इस अवसर पर न्यायपालिका और विधिक सेवा से जुड़े कई अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान यह संदेश दिया गया कि लोक अदालत आम लोगों को त्वरित और सुलभ न्याय दिलाने का एक प्रभावी माध्यम है, जिससे लंबे समय से लंबित मामलों का समाधान तेजी से किया जा सकता है।

सुलह-समझौते से विवादों का समाधान

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि लोक अदालत विवादों के समाधान का एक महत्वपूर्ण मंच है। यहां मामलों का निपटारा आपसी सहमति और राजीनामे के आधार पर किया जाता है, जिससे दोनों पक्षों को संतोषजनक परिणाम मिलता है।

उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के माध्यम से लोग अपने विवादों का समाधान सरल, शीघ्र और सौहार्दपूर्ण तरीके से कर सकते हैं। इसके साथ ही अदालतों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है और न्याय प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है। उन्होंने यह भी बताया कि लोक अदालत की प्रक्रिया में किसी प्रकार की जटिल कानूनी औपचारिकताएं नहीं होतीं, जिससे आम लोगों को न्याय प्राप्त करने में आसानी होती है।

प्रदेशभर में 480 बेंचों का गठन

राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के तत्वावधान में और राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में किया गया। इस संबंध में विशेष सचिव महेंद्र प्रताप बेनीवाल ने जानकारी दी कि राज्यभर में बड़ी संख्या में मामलों के निस्तारण के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।

उन्होंने बताया कि जोधपुर और जयपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट की दोनों पीठों में तीन-तीन बेंचों का गठन किया गया है। इसके अलावा प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों में कुल 480 बेंचें बनाई गई हैं। इन बेंचों में विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई कर उन्हें आपसी समझौते के आधार पर निपटाने का प्रयास किया जा रहा है।

10 लाख से अधिक मामलों के निपटारे का लक्ष्य

इस बार राष्ट्रीय लोक अदालत में बड़ी संख्या में मामलों के निस्तारण का लक्ष्य रखा गया है। 6 मार्च तक के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में प्री-लिटिगेशन के 7,91,384 मामलों को लोक अदालत के लिए चिन्हित किया गया है। इसके अलावा न्यायालयों में लंबित 2,32,478 मामलों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है।

इस प्रकार कुल 10,23,842 मामलों को लोक अदालत के माध्यम से सुलह और समझौते के आधार पर निपटाने की तैयारी की गई है। अधिकारियों के अनुसार यह संख्या दर्शाती है कि लोगों में इस व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ रहा है और वे अपने विवादों को जल्द और सरल तरीके से सुलझाने के लिए लोक अदालत का सहारा ले रहे हैं।

ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से सुनवाई

राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलों की सुनवाई ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से की जा रही है। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी अपने मामलों का निपटारा करवाने में सुविधा मिलती है।

विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य यह है कि आम नागरिकों को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराया जाए। विशेष रूप से छोटे-छोटे विवाद, जैसे बैंक ऋण से जुड़े मामले, बिजली-पानी के बिल, ट्रैफिक चालान और पारिवारिक विवाद, लोक अदालत के माध्यम से जल्दी निपटाए जा सकते हैं।

न्याय प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में पहल

राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी और सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जाती है। इसके माध्यम से न केवल अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम होता है, बल्कि लोगों को भी समय और धन की बचत होती है।

राजस्थान में आयोजित इस राष्ट्रीय लोक अदालत से उम्मीद की जा रही है कि बड़ी संख्या में मामलों का समाधान आपसी सहमति से होगा और लोगों को त्वरित न्याय मिल सकेगा। यह पहल न्याय व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी और जनहितकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।