31 मार्च तक सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियों पर रोक, वित्त वर्ष खत्म होने से पहले तेजी से निपटाए जाएंगे काम
वित्त वर्ष के अंतिम दिनों में सरकारी कामकाज को तेजी से पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। सरकार ने 31 मार्च तक सभी सरकारी दफ्तरों में अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियों पर रोक लगा दी है। इस संबंध में राज्य के Chief Secretary ने सभी विभागों को निर्देश जारी किए हैं कि अत्यंत आवश्यक या आपात स्थिति को छोड़कर किसी भी कर्मचारी को अवकाश न दिया जाए। इसके साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने पर भी अस्थायी रोक लगा दी गई है।
वित्त वर्ष के अंतिम दिनों में बढ़ा कामकाज
सरकार का कहना है कि वित्त वर्ष के अंतिम चरण में विभागों में काम का दबाव काफी बढ़ जाता है। ऐसे में यह जरूरी है कि सभी अधिकारी और कर्मचारी अपने दफ्तरों में उपस्थित रहकर लंबित कामों को समय पर पूरा करें। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह रोक केवल कर्मचारियों द्वारा ली जाने वाली छुट्टियों पर लागू होगी, जबकि नियमित सरकारी अवकाश जैसे शनिवार और रविवार पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले विभागों से जुड़े सभी प्रशासनिक और वित्तीय कार्य समय पर पूरे हो सकें।
पहले भी लग चुकी है छुट्टियों पर रोक
इससे पहले भी कुछ विशेष परिस्थितियों में कर्मचारियों की छुट्टियों पर रोक लगाई जा चुकी है। हाल ही में मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईंधन संकट की स्थिति के कारण कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की बुकिंग पर रोक लगने के बाद खाद्य विभाग से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियों पर भी रोक लगाई गई थी। उस समय यह आदेश मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद जारी किया गया था ताकि संभावित आपूर्ति संकट से निपटने के लिए विभाग पूरी तरह सक्रिय रह सके।
अब वित्त वर्ष 2025-26 के समापन को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने एक बार फिर सभी विभागों में कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया है।
बजट लैप्स से बचाने के लिए मार्च में तेज होता काम
सरकारी विभागों में हर साल मार्च के महीने में कामकाज की रफ्तार काफी बढ़ जाती है। इसका मुख्य कारण यह होता है कि विभागों को दिए गए बजट को वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले खर्च करना होता है। यदि तय समय तक बजट का उपयोग नहीं किया जाता, तो वह राशि लैप्स हो जाती है।
यही वजह है कि मार्च के अंतिम दिनों में टेंडर जारी करने, वर्क ऑर्डर देने, प्रशासनिक मंजूरियां लेने और भुगतान से जुड़े काम तेजी से किए जाते हैं। इस समय विभागों में कई परियोजनाओं से संबंधित प्रक्रियाओं को जल्दी-जल्दी पूरा किया जाता है ताकि बजट का अधिकतम उपयोग हो सके।
आखिरी तिमाही में सबसे ज्यादा खर्च
सरकारी आंकड़ों के अनुसार बजट खर्च करने की गति आमतौर पर वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में सबसे ज्यादा होती है। मार्च के महीने में अचानक खर्च बढ़ने की प्रवृत्ति पर कई बार सवाल भी उठ चुके हैं। राज्य विधानसभा में बजट और अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कई विधायकों ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा है कि बजट का उपयोग पूरे वर्ष संतुलित तरीके से होना चाहिए।
विधायकों का कहना रहा है कि यदि योजनाओं पर समय रहते काम शुरू हो जाए, तो आखिरी समय में जल्दबाजी में फैसले लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
पहले से बजट जल्दी आने के बावजूद नहीं बदली स्थिति
पिछले लगभग एक दशक से राज्य का बजट फरवरी महीने में पेश किया जा रहा है, ताकि नए वित्त वर्ष की शुरुआत से पहले ही योजनाओं पर काम शुरू किया जा सके। इससे विभागों को अप्रैल से ही परियोजनाओं पर कार्य शुरू करने का अवसर मिल जाता है।
इसके बावजूद सरकारी विभागों में बजट खर्च करने का पुराना ट्रेंड अभी तक पूरी तरह नहीं बदल पाया है। अधिकतर विभागों में वित्तीय प्रक्रियाएं और परियोजनाओं से जुड़े निर्णय मार्च के महीने में तेजी से पूरे किए जाते हैं।
सरकार की कोशिश, समय पर पूरा हो काम
सरकार और प्रशासन की ओर से समय-समय पर विभागों को निर्देश दिए जाते रहे हैं कि बजट का उपयोग पूरे वर्ष में योजनाबद्ध तरीके से किया जाए। मौजूदा मुख्यमंत्री समेत पूर्व मुख्यमंत्रियों ने भी कई बार अधिकारियों को इस दिशा में सुधार करने के निर्देश दिए हैं।
अब तो स्थिति यह हो गई है कि विधानसभा में बजट पेश होने के तुरंत बाद ही योजनाओं को लागू करने और कार्य शुरू करने के लिए विभागीय बैठकों का आयोजन किया जाने लगा है। इसके बावजूद मार्च में काम की रफ्तार अचानक बढ़ने का चलन अभी भी बना हुआ है। ऐसे में सरकार का मानना है कि कर्मचारियों की छुट्टियों पर अस्थायी रोक लगाने से विभागों के लंबित कार्यों को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी।