अमेरिका-इजराइल और ईरान तनाव का असर: कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस सप्लाई ठप, होटल-रेस्टोरेंट पर संकट
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। खाड़ी क्षेत्र में अस्थिर हालात के कारण गैस सप्लाई बाधित हो गई है, जिससे देश के कई राज्यों में कॉमर्शियल LPG सिलेंडरों की भारी किल्लत पैदा हो गई है। दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक समेत कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर अघोषित रोक जैसी स्थिति बन गई है।
गैस की कमी का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और छोटे कारोबारों पर पड़ रहा है। कई शहरों में होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की नौबत आ गई है। हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने जमाखोरी रोकने और गैस की सप्लाई नियंत्रित करने के लिए देशभर में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 लागू कर दिया है।
गैस संकट से होटल और रेस्टोरेंट उद्योग प्रभावित
कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी का सबसे ज्यादा असर होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर पड़ा है। कई शहरों में होटल संचालकों का कहना है कि उनके पास खाना बनाने के लिए गैस का कोई विकल्प नहीं है।
महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहरों में गैस की कमी के कारण लगभग 20 प्रतिशत होटल और रेस्टोरेंट बंद हो चुके हैं। होटल एसोसिएशन ‘आहार’ ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में करीब आधे होटल बंद हो सकते हैं।
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में भी होटल एसोसिएशन ने कहा है कि होटल इंडस्ट्री आवश्यक सेवाओं में आती है। अगर गैस सप्लाई बंद रहती है तो बुजुर्गों, छात्रों और मरीजों को खाने की भारी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
कई राज्यों में डिलीवरी में भारी देरी
गैस सप्लाई संकट का असर अलग-अलग राज्यों में अलग तरीके से देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर और वाराणसी जैसे शहरों में कॉमर्शियल सिलेंडर की डिलीवरी में चार से पांच दिन तक की देरी हो रही है।
मध्य प्रदेश में होटल संचालकों का कहना है कि कीमत बढ़ने के बावजूद उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। भोपाल में लगभग दो हजार से ज्यादा होटल और रेस्टोरेंट कॉमर्शियल सिलेंडर पर निर्भर हैं, जिससे वहां कारोबार प्रभावित हो रहा है।
राजस्थान में होटल-रेस्टोरेंट के साथ-साथ मैरिज गार्डन और छोटे उद्योगों से जुड़े लोग भी परेशान हैं। उनका कहना है कि तेल कंपनियों का अचानक लिया गया फैसला कारोबार के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है।
सरकार ने लागू किया आवश्यक वस्तु अधिनियम
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 लागू कर दिया है। यह कानून सरकार को किसी भी जरूरी वस्तु की सप्लाई और कीमतों को नियंत्रित करने का अधिकार देता है।
इस कानून के तहत व्यापारियों के लिए स्टॉक की सीमा तय की जाती है ताकि वे जरूरत से ज्यादा सामान जमा करके कृत्रिम संकट न पैदा कर सकें। गैस की जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने LPG सप्लाई को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है।
पहली श्रेणी में घरेलू रसोई गैस और CNG को रखा गया है, जिन्हें पूरी सप्लाई दी जाएगी। दूसरी श्रेणी में खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों को लगभग 70 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी। तीसरी श्रेणी में बड़े उद्योगों को करीब 80 प्रतिशत गैस दी जाएगी। चौथी श्रेणी में छोटे उद्योगों, होटल और रेस्टोरेंट को भी उनकी पुरानी खपत के हिसाब से लगभग 80 प्रतिशत गैस देने की योजना है।
संकट से निपटने के लिए सरकार के कदम
गैस संकट से निपटने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीनों सरकारी तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो गैस सप्लाई की नियमित समीक्षा करेगी।
इसके अलावा घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक किया जा सकेगा।
जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी के समय OTP और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया गया है। सरकार ने सभी रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का भी आदेश दिया है, जिसके बाद घरेलू गैस उत्पादन में करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
गैस संकट की मुख्य वजहें
गैस सप्लाई में कमी की सबसे बड़ी वजह फारस की खाड़ी का महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद हो जाना है। यह 167 किलोमीटर लंबा जलमार्ग है, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही होती है। भारत भी अपनी जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 54 प्रतिशत LNG इसी रास्ते से आयात करता है।
दूसरी वजह कतर के LNG प्लांट का उत्पादन रुकना है। ईरान द्वारा किए गए ड्रोन हमलों के बाद कतर ने अपने LNG उत्पादन को अस्थायी रूप से रोक दिया है। भारत अपनी कुल LNG जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत कतर से ही आयात करता है, इसलिए इसका सीधा असर देश की गैस सप्लाई पर पड़ा है।
कब तक सुधर सकते हैं हालात
इंडियन ऑयल के अधिकारियों का कहना है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है और पैनिक बुकिंग से बचना चाहिए। सरकार वैकल्पिक स्रोतों से गैस आयात करने के विकल्प तलाश रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर G7 देश भी अपने इमरजेंसी तेल भंडार से सप्लाई बढ़ाने पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि वैश्विक ऊर्जा संकट को कम किया जा सके। रूस और अल्जीरिया जैसे देशों से अतिरिक्त कच्चा तेल मिलने की भी उम्मीद जताई जा रही है।
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी
इस बीच सरकार ने घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में भी 60 रुपए की बढ़ोतरी की है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू गैस सिलेंडर अब 913 रुपए में मिल रहा है, जबकि पहले इसकी कीमत 853 रुपए थी। बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू हो चुकी हैं। वहीं 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत पहले ही 115 रुपए बढ़कर 1883 रुपए हो चुकी है।