मिडिल ईस्ट में युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा, कतर ने दी गंभीर चेतावनी
मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और तनाव के बीच कतर ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। कतर के ऊर्जा मंत्री Saad Sherida Al-Kaabi ने कहा है कि यदि इस क्षेत्र में संघर्ष लंबा चलता है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था कमजोर हो सकती है। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर खतरा मंडराने लगा है।
एक रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि अगर यह संघर्ष तुरंत समाप्त भी हो जाए, तब भी कतर को अपने सामान्य गैस आपूर्ति चक्र को बहाल करने में कई सप्ताह से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है। इसका कारण हाल ही में हुए ड्रोन हमले हैं, जिनमें कतर के सबसे बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस संयंत्र को नुकसान पहुंचा है।
रास लाफान गैस संयंत्र पर हमला
कतर के सबसे बड़े एलएनजी केंद्र Ras Laffan Industrial City पर हाल ही में हुए हमले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। यह संयंत्र दुनिया में एलएनजी निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हमले के बाद कतर ने अपनी गैस आपूर्ति में व्यवधान को देखते हुए ‘फोर्स मेज्योर’ की घोषणा कर दी है।
‘फोर्स मेज्योर’ एक कानूनी प्रावधान होता है, जिसके तहत किसी अप्रत्याशित आपदा या युद्ध की स्थिति में कंपनियां अपने अनुबंधों को अस्थायी रूप से पूरा न कर पाने की स्थिति में जिम्मेदारी से राहत मांग सकती हैं। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि कई अन्य निर्यातक भी जल्द ही इस प्रावधान का सहारा ले सकते हैं।
अन्य निर्यातकों पर भी बढ़ेगा दबाव
काबी ने यह भी कहा कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो खाड़ी क्षेत्र के कई ऊर्जा निर्यातकों को अपने अनुबंधों को पूरा करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि जो कंपनियां अभी तक फोर्स मेज्योर का सहारा नहीं ले रही हैं, वे भी आने वाले दिनों में ऐसा करने पर मजबूर हो सकती हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कंपनियां ऐसा नहीं करतीं तो उन्हें बाद में कानूनी जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और बढ़ सकती है।
यूरोप और एशिया के बीच बढ़ सकती है प्रतिस्पर्धा
कतर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलएनजी उत्पादक देश माना जाता है। हालांकि कतर की गैस का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा यूरोप को जाता है, लेकिन फिर भी इस संकट का असर वहां के बाजार पर पड़ सकता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि एशियाई देश गैस की सीमित उपलब्धता के बीच यूरोपीय देशों से अधिक कीमत देकर आपूर्ति हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।
ऐसी स्थिति में यूरोप के लिए ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना और अधिक कठिन हो सकता है। इसके साथ ही अन्य खाड़ी देशों के उत्पादकों को भी अपने अनुबंधों को पूरा करने में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
मानवीय संकट की स्थिति गहराई
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर केवल अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवीय संकट का रूप भी लेता जा रहा है। United Nations High Commissioner for Refugees ने चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र की स्थिति तेजी से गंभीर होती जा रही है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार लेबनान में करीब एक लाख लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं। इसके अलावा हजारों सीरियाई शरणार्थी सीमा पार कर वापस अपने देश लौटने के लिए मजबूर हो गए हैं।
संयुक्त राष्ट्र के आपातकालीन और कार्यक्रम सहायता निदेशक Ayaki Ito ने जिनेवा में आयोजित एक प्रेस वार्ता में कहा कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता संकट एक बड़ी मानवीय आपात स्थिति बन चुका है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में संघर्ष जल्द समाप्त नहीं हुआ तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और मानवीय स्थिति पर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।