नेपाल में संसदीय चुनाव के शुरुआती नतीजों में RSP की बढ़त, बालेन शाह ने ओली को छोड़ा पीछे
नेपाल में 5 मार्च को हुए संसदीय चुनाव के बाद मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों में एक नई राजनीतिक ताकत उभरती दिखाई दे रही है। नेपाली मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती गिनती में Rastriya Swatantra Party यानी आरएसपी कई सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। बताया जा रहा है कि अब तक जिन सीटों के शुरुआती रुझान सामने आए हैं, उनमें से 35 सीटों पर आरएसपी के उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। इससे नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि यह पार्टी पारंपरिक दलों के लंबे समय से चले आ रहे दबदबे को चुनौती दे रही है।
प्रधानमंत्री पद की दौड़ में बालेन शाह की बढ़त
इस चुनाव में सबसे अधिक चर्चा Balen Shah को लेकर हो रही है, जो आरएसपी की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार माने जा रहे हैं। पूर्व में काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी के मेयर रह चुके बालेन शाह पूर्वी नेपाल के झापा-5 क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। यहां उनका मुकाबला नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री K. P. Sharma Oli से है।
शुरुआती वोटों की गिनती के अनुसार, बालेन शाह को 1,478 वोट मिल चुके हैं, जबकि ओली को अब तक 385 वोट प्राप्त हुए हैं। इन आंकड़ों के आधार पर बालेन शाह ने शुरुआती दौर में काफी बड़ी बढ़त बना ली है। यह मुकाबला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि झापा क्षेत्र को लंबे समय से ओली का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है।
पारंपरिक दलों के लिए चुनौती बन रही आरएसपी
ताजा रुझानों के मुताबिक आरएसपी लगभग 39 चुनावी क्षेत्रों में आगे चल रही है। इसके बाद Nepali Congress तीन क्षेत्रों में बढ़त बनाए हुए है, जबकि Nepal Communist Party दो क्षेत्रों में आगे है। वहीं ओली की पार्टी Communist Party of Nepal (Unified Marxist–Leninist) को शुरुआती रुझानों में किसी भी क्षेत्र में बढ़त मिलती नहीं दिखाई दे रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यही रुझान अंतिम परिणामों में भी बने रहते हैं तो नेपाल की राजनीति में दशकों से चले आ रहे पारंपरिक दलों का प्रभुत्व कमजोर पड़ सकता है और नई राजनीतिक शक्तियों का उदय हो सकता है।
संसद की सीटों के लिए कैसे हो रहा है चुनाव
नेपाल की संसद के निचले सदन में कुल 275 सदस्य होते हैं। इनमें से 165 सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली यानी फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट सिस्टम के जरिए किया जाता है। जबकि बाकी 110 सदस्यों का चयन आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर होता है। इस बार भी मतगणना इसी प्रक्रिया के अनुसार की जा रही है और शुरुआती परिणामों से राजनीतिक समीकरण बदलते हुए नजर आ रहे हैं।
जेन-जी आंदोलन के बाद पहला बड़ा चुनाव
नेपाल में यह चुनाव पिछले साल सितंबर में हुए बड़े जन आंदोलन के बाद हो रहा है। उस समय युवाओं और खासकर जेनरेशन-ज़ी के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों ने देश की राजनीति को झकझोर कर रख दिया था। इन प्रदर्शनों के बाद उस समय की सरकार गिर गई थी, जिसका नेतृत्व के.पी. शर्मा ओली कर रहे थे।
इन प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में युवाओं ने पारंपरिक राजनीतिक दलों और उनके नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि लंबे समय से वही दल और नेता सत्ता में बने हुए हैं, जिसकी वजह से देश का विकास अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहा है।
नई राजनीति की ओर झुकाव
विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं के इसी असंतोष का फायदा आरएसपी जैसी नई राजनीतिक पार्टियों को मिल रहा है। इस पार्टी का नेतृत्व पूर्व मीडिया व्यक्तित्व Rabi Lamichhane कर रहे हैं।
शुरुआती नतीजों से यह संकेत मिल रहे हैं कि नेपाल के मतदाता पारंपरिक राजनीति से हटकर नए विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। यदि अंतिम परिणाम भी इसी दिशा में आते हैं तो नेपाल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है, जिसमें युवा नेतृत्व और नई राजनीतिक सोच को अधिक महत्व मिल सकता है।