विदेश नीति को लेकर राहुल गांधी का पीएम मोदी पर हमला, कहा– समझौतावादी नेतृत्व का परिणाम है मौजूदा स्थिति
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक राजनीतिक हालात के बीच कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने भारत की विदेश नीति को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री Narendra Modi पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने कहा कि वर्तमान समय में भारत की विदेश नीति जिस स्थिति में दिखाई दे रही है, वह किसी ठोस रणनीति का परिणाम नहीं है, बल्कि एक समझौतावादी नेतृत्व के शोषण का नतीजा है। उन्होंने यह टिप्पणी उस समय की है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है।
सोशल मीडिया पर पोस्ट कर जताई नाराजगी
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए भारत की विदेश नीति को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा कि भारत की विदेश नीति हमेशा देश के लोगों की सामूहिक इच्छा से आकार लेती है। उनके अनुसार भारत की विदेश नीति की जड़ें देश के इतिहास, भौगोलिक परिस्थितियों और सत्य तथा अहिंसा पर आधारित आध्यात्मिक परंपराओं में होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा समय में जो स्थिति दिखाई दे रही है, उसे वास्तविक नीति नहीं कहा जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान विदेश नीति एक ऐसे व्यक्ति के नेतृत्व का परिणाम है जो समझौतावादी है और जिसके कारण देश की रणनीतिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
पश्चिम एशिया के युद्ध को लेकर भी उठाए सवाल
राहुल गांधी ने इससे एक दिन पहले भी पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय एक अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुकी है और आगे गंभीर संकट की आशंका दिखाई दे रही है। उनके अनुसार इस संघर्ष का प्रभाव भारत पर भी पड़ सकता है, खासकर ऊर्जा आपूर्ति के मामले में।
उन्होंने कहा कि भारत की तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है और इसमें से 40 प्रतिशत से अधिक आयात Strait of Hormuz के रास्ते होता है। यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर असर पड़ने की संभावना है।
एलपीजी और एलएनजी आपूर्ति को लेकर जताई चिंता
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ता है तो केवल कच्चे तेल की आपूर्ति ही नहीं बल्कि एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इन दोनों ऊर्जा संसाधनों के लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि संघर्ष अब भारत के आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार हिंद महासागर क्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत के डूबने की घटना भी इस तनाव को और गंभीर बना रही है।
स्थिर नेतृत्व की जरूरत पर दिया जोर
राहुल गांधी ने कहा कि ऐसे समय में जब वैश्विक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और कई क्षेत्रों में संघर्ष की स्थिति बनी हुई है, भारत को मजबूत और स्थिर नेतृत्व की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान नेतृत्व रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखने में असफल रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत को अपनी विदेश नीति में स्वतंत्र और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है ताकि वैश्विक संकटों के बीच देश के हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा की जा सके। राहुल गांधी के इस बयान के बाद देश की राजनीति में विदेश नीति को लेकर एक बार फिर बहस तेज होने की संभावना जताई जा रही है।