दुनिया में युद्ध क्यों हो रहे हैं? मोहन भागवत ने बताई वजह, कहा– हम अपने एकत्व को नहीं पहचानते
दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते युद्ध और तनाव के बीच Mohan Bhagwat ने वैश्विक हालात पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में लगातार संघर्ष और युद्ध इसलिए हो रहे हैं क्योंकि इंसान अपने वास्तविक एकत्व को पहचान नहीं पा रहा है। उन्होंने कहा कि लोग यह भूल चुके हैं कि भले ही हम अलग-अलग दिखते हों, लेकिन मूल रूप से हम सब एक ही हैं। जब तक मानवता इस सत्य को नहीं समझेगी, तब तक दुनिया में कलह और संघर्ष खत्म नहीं होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि आज लोग मन की करुणा और मानवता को भूल गए हैं। इसी वजह से एक देश दूसरे देश के खिलाफ खड़ा हो रहा है और दुनिया में शांति स्थापित नहीं हो पा रही है।
धर्मसभा में दिया संबोधन
संघ प्रमुख यह विचार जैसलमेर में आयोजित जैन समुदाय के ‘चादर महोत्सव’ के उद्घाटन के अवसर पर आयोजित धर्मसभा में व्यक्त कर रहे थे। यह कार्यक्रम जैन समाज के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में से एक है। इस दौरान उन्होंने विश्व इतिहास के संदर्भ में भी युद्धों और शांति प्रयासों का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि प्रथम विश्व युद्ध के बाद यह उम्मीद की गई थी कि भविष्य में ऐसे विनाशकारी युद्ध दोबारा नहीं होंगे। इसी उद्देश्य से League of Nations की स्थापना की गई थी, लेकिन वह संस्था ज्यादा समय तक प्रभावी नहीं रह सकी। इसके बाद द्वितीय विश्व युद्ध हुआ और फिर विश्व में स्थायी शांति कायम करने के उद्देश्य से United Nations का गठन किया गया।
हालांकि उन्होंने कहा कि आज के हालात देखकर यह साफ दिखाई देता है कि दुनिया में युद्ध और संघर्ष अभी भी जारी हैं और कई मामलों में संयुक्त राष्ट्र भी प्रभावी ढंग से उन्हें रोकने में सफल नहीं हो पा रहा है।
एकता की कमी से बढ़ते हैं संघर्ष
मोहान भागवत ने कहा कि जब तक समाज अपने भीतर के एकत्व को नहीं पहचानेगा, तब तक झगड़े और संघर्ष समाप्त नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय काफी चुनौतीपूर्ण है और विभिन्न देशों, समाजों और विचारधाराओं के बीच प्रतिस्पर्धा और टकराव बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई बार आक्रमण और संघर्ष इसलिए भी होते हैं क्योंकि समाज के लोग बंटे हुए रहते हैं और एकजुट नहीं होते। जब समाज जागरूक और संगठित नहीं रहता तो बाहरी चुनौतियां और आक्रमण भी बढ़ जाते हैं।
कैसे बनेगा बेहतर समाज
संघ प्रमुख ने कहा कि यदि लोग अपने जीवन से भेदभाव और स्वार्थ को समाप्त कर दें और देश तथा समाज के लिए समर्पित होकर काम करें, तो समाज में कई समस्याएं स्वतः खत्म हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि जब समाज एकजुट होकर काम करेगा तो आपसी कलह भी समाप्त होगी और देश भी समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि भारत अपने मूल्यों के आधार पर आगे बढ़े तो वह न केवल समृद्ध राष्ट्र बनेगा बल्कि विश्वगुरु के रूप में भी स्थापित हो सकता है और दुनिया को एक नई सुखी और सुंदर दिशा दे सकता है।
सद्भावना से ही निकल सकता है समाधान
अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान केवल तर्क या समझौते से नहीं निकलता। उनके अनुसार विवादों को सुलझाने का सबसे प्रभावी रास्ता सद्भावना है। उन्होंने कहा कि जब तक मन में सद्भावना नहीं होगी, तब तक किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता।
उन्होंने समाज से अपील की कि धीरे-धीरे पूरे समाज को सद्भावना के रास्ते पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है, तभी दुनिया में स्थायी शांति स्थापित हो सकेगी।
जैसलमेर में धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए भागवत
धर्मसभा में शामिल होने से पहले मोहन भागवत ने जैसलमेर के प्रसिद्ध Jaisalmer Fort की गलियों में ई-रिक्शा से भ्रमण किया और वहां स्थित Parshvanath Jain Temple में पूजा-अर्चना की।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दादा गुरुदेव की स्मृति में एक स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट का भी विमोचन किया। गच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरी जी की पावन निश्रा में आयोजित तीन दिवसीय चादर महोत्सव के अंतर्गत शनिवार को विश्वभर में एक करोड़ आठ लाख श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक दादागुरु इकतीसा पाठ करने का महासंकल्प भी लिया जाएगा। निर्धारित समय पर देश और विदेश में श्रद्धालु एक साथ इस पाठ का आयोजन करेंगे, जिसे जैन समुदाय का ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन माना जा रहा है।