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अजमेर नगर निगम में फर्जी पट्टों का मामला: सदन में गूंजा मुद्दा, चार अधिकारी एपीओ

 

अजमेर नगर निगम में नियमों के विरुद्ध पट्टे जारी किए जाने का मामला सामने आने के बाद यह मुद्दा अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर बन गया है। विधानसभा में बाड़मेर के शिव विधायक Ravindra Singh Bhati ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से इस विषय को उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि पिछले तीन माह में नगर निगम की ओर से जारी किए गए सभी पट्टों की जांच कराई जानी चाहिए और यदि किसी अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

सदन में उठाया गया मामला

विधानसभा में चर्चा के दौरान विधायक रविन्द्रसिंह भाटी ने आरोप लगाया कि अजमेर नगर निगम में भूमि के पट्टे जारी करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि नियमों को दरकिनार कर पट्टे जारी किए गए हैं, जिससे सरकारी भूमि के दुरुपयोग की आशंका पैदा हो गई है। भाटी ने कहा कि यदि समय रहते इसकी जांच नहीं कराई गई तो यह मामला और बड़ा घोटाला बन सकता है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि पिछले तीन माह में जारी किए गए सभी पट्टों की विस्तृत जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

मंत्री ने माना मामला गंभीर

इस मामले में जवाब देते हुए नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री Jhabar Singh Kharra ने कहा कि यह मामला गंभीर है और सरकार इसे हल्के में नहीं ले रही है। उन्होंने बताया कि फर्जी पट्टा जारी करने के मामले में प्रारंभिक जांच के आधार पर चार अधिकारियों को जिम्मेदार माना गया है। इनमें उपायुक्त विकास, वरिष्ठ प्रारूपकार, कनिष्ठ अभियंता सिविल और कनिष्ठ सहायक शामिल हैं।

मंत्री ने बताया कि इन चारों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से एपीओ कर दिया गया है और उन्हें अजमेर से हटाकर जयपुर में पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा गया है।

भूमि विवाद का पूरा मामला

खर्रा ने बताया कि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार ग्राम थोक तेलियान की खाता संख्या 480, खसरा संख्या 2227 की भूमि वर्ष 1971 में नगर सुधार न्यास द्वारा अधिग्रहित की जा चुकी थी। इस भूमि के संबंध में मुआवजा देने के लिए संबंधित पक्षों को बुलाया गया था, लेकिन सभी लोग सहमत नहीं हुए। इसी कारण यह भूमि यूआईटी के नाम दर्ज नहीं हो सकी।

इसके बावजूद वर्ष 2020 में इस भूमि पर 1450 वर्ग गज का आवासीय नक्शा स्वीकृत कर दिया गया। बाद में जब इस मामले में शिकायत प्राप्त हुई तो जांच कराई गई और जांच में अनियमितता सामने आने पर नक्शे को निरस्त कर दिया गया।

झूठे शपथ पत्र से लिया गया पट्टा

मंत्री ने कहा कि जांच में यह भी सामने आया कि आवेदक ने झूठे शपथ पत्र देकर पट्टा प्राप्त किया था। इस मामले में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पत्र लिखा गया है।

मामले की जानकारी सामने आने के बाद अजमेर नगर निगम ने 2 फरवरी 2026 को उक्त पट्टा निरस्त कर दिया। इसके साथ ही ऑनलाइन पत्रकावली को भी रद्द कर दिया गया है और उपपंजीयक को भी पट्टा निरस्त करने के लिए पत्र भेजा गया है।

छह माह के सभी पट्टों की होगी जांच

मंत्री खर्रा ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पिछले छह माह में नगर निगम द्वारा जारी किए गए सभी पट्टों की जांच कराने का निर्णय लिया गया है। यह जांच अजमेर के कलेक्टर Lokbandhu को सौंपी गई है और इसे अतिरिक्त जिला कलेक्टर स्तर के अधिकारी से कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि दो सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद यदि किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मेयर का कार्यकाल पूरा, निगम में प्रशासक

गौरतलब है कि अजमेर नगर निगम की मेयर ब्रजलता हाड़ा का कार्यकाल 30 जनवरी को पूरा हो चुका है। इसके बाद से नगर निगम का प्रशासनिक कार्यभार संभागीय आयुक्त शक्तिसिंह राठौड़ के पास है, जिन्हें वर्तमान में निगम का प्रशासक बनाया गया है।