News Image

पोस्ट-बजट वेबिनार में पीएम मोदी का संबोधन: पिछले एक दशक के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में बदलाव

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पोस्ट-बजट के पहले वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का हर सुधार और हर बजटीय आवंटन ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बजट के बाद आयोजित होने वाले ये वेबिनार केवल औपचारिकता नहीं हैं, बल्कि नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और सहभागिता सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण मंच हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार के सभी नीतिगत फैसलों का उद्देश्य दीर्घकालिक विकास को गति देना और भारत को एक विकसित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करना है।

पिछले दशक में अर्थव्यवस्था का बदलाव

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पिछले एक दशक के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में आए बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अवधि में देश की अर्थव्यवस्था ने अभूतपूर्व मजबूती और लचीलापन दिखाया है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत ने स्थिरता बनाए रखी और निरंतर विकास की दिशा में कदम बढ़ाए। उनके अनुसार, सरकार ने इस दौरान कई संरचनात्मक और नीतिगत सुधार लागू किए, जिससे आर्थिक ढांचे को मजबूती मिली और निवेश के नए अवसर बने।

उन्होंने यह भी कहा कि सुधारों की यह श्रृंखला केवल अल्पकालिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में देश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है।

नीति-निर्माण के साथ प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

‘टेक्नोलॉजी, रिफॉर्म्स एंड फाइनेंस फॉर विकसित भारत’ विषय पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधारों की रफ्तार बनाए रखने के लिए केवल नीति-निर्माण पर्याप्त नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बेहतर और तेज क्रियान्वयन पर समान रूप से ध्यान देना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी सुधार का वास्तविक मूल्यांकन उसके जमीनी प्रभाव के आधार पर होना चाहिए। जब तक नीतियों का लाभ आम नागरिकों और उद्योग जगत तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंचेगा, तब तक उनका उद्देश्य अधूरा रहेगा। उन्होंने पारदर्शिता, गति और जवाबदेही बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों के उपयोग पर बल दिया। साथ ही, शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत बनाने की आवश्यकता भी बताई।

रिफॉर्म एक्सप्रेस और निवेशकों के लिए संदेश

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को आगे बढ़ाने के लिए सभी हितधारकों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार व्यवस्था को अधिक पूर्वानुमानित और निवेशकों के अनुकूल बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। बॉन्ड मार्केट सुधारों को उन्होंने दीर्घकालिक आर्थिक विकास का सक्षम साधन बताया।

उन्होंने कहा कि एक स्थिर और पारदर्शी नीति ढांचा निवेशकों के विश्वास को मजबूत करता है और इससे देश में पूंजी प्रवाह बढ़ता है। सरकार का लक्ष्य ऐसी आर्थिक संरचना तैयार करना है, जिसमें निजी क्षेत्र सक्रिय भागीदारी निभा सके।

पूंजीगत व्यय में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में हुए बड़े बदलाव की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि 11 वर्ष पहले जहां पूंजीगत व्यय लगभग 2 लाख करोड़ रुपये था, वहीं मौजूदा बजट में यह बढ़कर करीब 12 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उनके अनुसार, यह बढ़ोतरी सरकार की विकास-उन्मुख सोच को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि इतना बड़ा सार्वजनिक निवेश निजी क्षेत्र के लिए स्पष्ट संदेश है कि अब उद्योग और वित्तीय संस्थान नई ऊर्जा और विश्वास के साथ आगे बढ़ें। साथ ही, उन्होंने परियोजनाओं में देरी और लागत वृद्धि को रोकने के लिए स्वीकृति प्रक्रिया और मूल्यांकन की गुणवत्ता को मजबूत करने की सलाह दी।

रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर का प्रस्ताव

प्रधानमंत्री ने सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और शिक्षाविदों के बीच एक स्पष्ट ‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि बजट पर चर्चा करना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी उसका तेज और सरल क्रियान्वयन है।

उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सभी हितधारक मिलकर काम करें और सुधारों को जमीन पर उतारें, तो ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य समय से पहले हासिल किया जा सकता है।