Generation Z के बीच लोकप्रिय हो रहा डिजिटल सनसेट ट्रेंड
तेजी से बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ते डिजिटल इस्तेमाल के बीच युवाओं की दिनचर्या पर स्क्रीन का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। देर रात तक मोबाइल, लैपटॉप और टीवी पर समय बिताना अब आम आदत बन चुकी है। खासकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर घंटों रील्स और वीडियो देखना युवाओं की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। इसका सीधा असर उनकी नींद, मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक ऊर्जा पर पड़ रहा है। इसी समस्या से निपटने के लिए जनरेशन जेड के बीच एक नया ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसे डिजिटल सनसेट कहा जा रहा है।
यह ट्रेंड खासतौर पर नौकरीपेशा युवाओं और कॉलेज स्टूडेंट्स के बीच तेजी से अपनाया जा रहा है। इसका मकसद स्क्रीन टाइम कम करके बेहतर नींद और संतुलित जीवनशैली की ओर कदम बढ़ाना है। कई युवा इसे अपनाकर अपने अनुभव भी साझा कर रहे हैं और इसे सकारात्मक बदलाव के रूप में देख रहे हैं।
क्या है डिजिटल सनसेट
डिजिटल सनसेट का सीधा अर्थ है रात में सोने से एक या दो घंटे पहले सभी डिजिटल स्क्रीन को बंद कर देना। इसमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट और टीवी जैसे उपकरणों से दूरी बना ली जाती है। इस दौरान व्यक्ति खुद को डिजिटल दुनिया से अलग कर शांत गतिविधियों में समय बिताता है।
विशेषज्ञों के अनुसार रात में स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट दिमाग को सक्रिय बनाए रखती है। इससे शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन का उत्पादन प्रभावित होता है, जो नींद लाने में मदद करता है। जब लोग देर रात तक स्क्रीन देखते रहते हैं, तो उन्हें नींद आने में देरी होती है और नींद की गुणवत्ता भी खराब हो जाती है। डिजिटल सनसेट इसी आदत को बदलने की एक पहल है।
इस ट्रेंड को अपनाने वाले युवा सोने से पहले फोन को साइलेंट मोड पर रखकर दूर रख देते हैं। कुछ लोग इस समय किताब पढ़ना पसंद करते हैं, तो कुछ ध्यान, हल्की स्ट्रेचिंग या शांत संगीत सुनकर मन को रिलैक्स करते हैं। कई लोग इस समय को परिवार के साथ बिताने का अवसर मानते हैं, जिससे आपसी संबंध भी मजबूत होते हैं।
नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर
डिजिटल सनसेट अपनाने वाले युवाओं का कहना है कि इससे उनकी नींद की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। उन्हें जल्दी नींद आने लगी है और सुबह उठने पर वे ज्यादा ताजगी महसूस करते हैं। शरीर का प्राकृतिक स्लीप साइकिल संतुलित रहने लगता है, जिससे दिनभर की ऊर्जा भी बेहतर रहती है।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव देखा जा रहा है। लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने से तुलना, तनाव और अनावश्यक चिंता बढ़ सकती है। जब व्यक्ति सोने से पहले डिजिटल दुनिया से दूरी बनाता है, तो दिमाग को आराम मिलता है और तनाव कम होता है। इससे भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।
आंखों और दिमाग को मिलता है आराम
रोजाना देर रात तक स्क्रीन देखने से आंखों में जलन, सिरदर्द और थकान जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। कई लोगों को आंखों से पानी आने या धुंधला दिखाई देने की शिकायत भी होती है। डिजिटल सनसेट अपनाने से आंखों को पर्याप्त आराम मिलता है। स्क्रीन से दूरी बनाने पर दिमाग की गतिविधि भी धीरे-धीरे शांत होने लगती है, जिससे शरीर नींद के लिए तैयार हो पाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे-छोटे बदलाव लंबे समय में बड़ा असर डालते हैं। यदि रोजाना सोने से पहले स्क्रीन से दूरी बनाई जाए, तो यह आदत धीरे-धीरे जीवनशैली का हिस्सा बन सकती है।
संतुलित जीवनशैली की ओर एक कदम
डिजिटल सनसेट केवल एक ट्रेंड नहीं, बल्कि संतुलित जीवन की ओर बढ़ाया गया कदम है। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में जहां हर समय ऑनलाइन रहना जरूरी समझा जाता है, वहां थोड़ी देर के लिए खुद को ऑफलाइन करना मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
यह छोटा सा बदलाव परिवार के साथ समय बढ़ाने, खुद के लिए वक्त निकालने और बेहतर नींद पाने में मदद कर सकता है। यदि नियमित रूप से इसे अपनाया जाए, तो यह आदत जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।