पराए शहर में होमसिकनेस: एक सामान्य लेकिन गहरा एहसास
नया शहर, नई सड़कें, नया माहौल और नई जिम्मेदारियां शुरुआत में उत्साह से भर देती हैं। सब कुछ रोमांचक लगता है और व्यक्ति नए अनुभवों को अपनाने के लिए तैयार रहता है। लेकिन कुछ ही दिनों या हफ्तों बाद अचानक मन भारी होने लगता है। मां के हाथ का खाना, परिवार की बातचीत, दोस्तों की हंसी और घर का सुकून याद आने लगता है। इसी भावना को होमसिकनेस कहा जाता है। यह एक सामान्य भावनात्मक अवस्था है, जो घर से दूर रहने पर लगभग हर व्यक्ति को महसूस होती है। कई बार लोग इसे अवसाद समझ बैठते हैं, लेकिन सही दिनचर्या और सकारात्मक सोच के साथ इस स्थिति को संभाला जा सकता है।
सकारात्मक दिनचर्या से करें शुरुआत
होमसिकनेस से निपटने का पहला कदम है एक संतुलित और सकारात्मक दिनचर्या बनाना। सुबह की शुरुआत हल्की वॉक, योग, मेडिटेशन या व्यायाम से की जा सकती है। शारीरिक गतिविधि से शरीर में ऊर्जा आती है और मन हल्का महसूस करता है। यदि संगीत सुनना पसंद हो तो सुबह के समय प्रेरणादायक या मनपसंद गीत सुनना भी लाभदायक हो सकता है। कमरे में ताजी हवा और धूप आने दें, क्योंकि प्राकृतिक रोशनी मूड को बेहतर बनाती है। एक व्यवस्थित दिनचर्या व्यक्ति को मानसिक स्थिरता देती है और अकेलेपन की भावना को कम करती है।
परिवार से जुड़े रहना जरूरी
कई लोगों को लगता है कि घर की याद इसलिए ज्यादा आती है क्योंकि वे परिवार से बात करते हैं। इसी सोच के कारण कुछ लोग बातचीत कम कर देते हैं, जो स्थिति को और कठिन बना सकता है। परिवार से जुड़ाव बनाए रखना मानसिक संतुलन के लिए बेहद आवश्यक है। रोज लंबी बातचीत करना जरूरी नहीं, लेकिन एक छोटा संदेश, फोन कॉल या वीडियो कॉल भी मन को सुकून दे सकता है। इससे दूरी का एहसास कम होता है और भावनात्मक सहारा मिलता है। परिवार से बातचीत व्यक्ति को यह एहसास कराती है कि वह अकेला नहीं है और उसके अपने हमेशा उसके साथ हैं।
नए रिश्ते बनाना है सबसे बड़ा सहारा
नए शहर में दोस्त बनाना होमसिकनेस से उबरने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। ऑफिस, कॉलेज या पड़ोस में लोगों से बातचीत शुरू करें। छोटी-छोटी मुलाकातें, चाय पर चर्चा या वीकेंड आउटिंग से नए संबंध बनते हैं। जब आसपास अपने जैसे लोग होते हैं, तो नया शहर भी धीरे-धीरे अपना लगने लगता है। सामाजिक जुड़ाव से आत्मविश्वास बढ़ता है और मन में सकारात्मकता आती है। नए दोस्त जीवन में नई ऊर्जा और खुशियां लाते हैं।
खुद को व्यस्त रखना है जरूरी
खाली समय में अक्सर घर की याद ज्यादा सताती है। इसलिए खुद को किसी रचनात्मक गतिविधि में व्यस्त रखना फायदेमंद होता है। कुकिंग, पेंटिंग, डांस, लेखन या जिम जैसी हॉबी अपनाई जा सकती है। इससे समय का सदुपयोग होता है और मन नकारात्मक विचारों से दूर रहता है। नई जगह को अपनाने में समय लगता है, इसलिए खुद पर अनावश्यक दबाव न डालें। वीकेंड पर नए शहर की जगहों को घूमें और वहां की संस्कृति को समझने की कोशिश करें।
होमसिकनेस एक अस्थायी भावनात्मक अवस्था है, जो समय के साथ कम हो जाती है। धैर्य, सकारात्मक सोच और छोटे-छोटे प्रयासों से इसे आसानी से संभाला जा सकता है। धीरे-धीरे नया शहर भी घर जैसा महसूस होने लगता है।