‘कांतारा’ विवाद में रणवीर सिंह को कर्नाटक हाई कोर्ट की फटकार
गोवा में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया के दौरान फिल्म ‘कांतारा’ पर की गई टिप्पणी और अभिनेता ऋषभ शेट्टी के किरदार की नकल करना बॉलीवुड अभिनेता Ranveer Singh के लिए कानूनी विवाद का कारण बन गया है। इस मामले में 24 फरवरी को Karnataka High Court ने सख्त रुख अपनाते हुए अभिनेता को फटकार लगाई। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि चाहे कोई सुपरस्टार हो या आम नागरिक, कानून से ऊपर कोई नहीं है।
हालांकि अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि जांच में सहयोग की शर्त पर रणवीर सिंह के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। साथ ही मामले की अगली सुनवाई 2 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई है और सरकार व अन्य प्रतिवादियों को आपत्तियां दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
जस्टिस एम नागप्रसन्ना की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस M Nagaprasanna ने अभिनेता की टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सेलिब्रिटी होने से किसी को भी बेलगाम भाषा इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं मिल जाता। अदालत ने यह भी कहा कि एक अभिनेता होने के नाते उनकी जिम्मेदारी अधिक है, क्योंकि वे बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करते हैं।
जस्टिस ने टिप्पणी की, “आप रणवीर सिंह हों या कोई और, लेकिन इस तरह बेलगाम होकर नहीं बोल सकते। हम यह देखेंगे कि आपका इरादा क्या था, लेकिन एक कलाकार होने के नाते आपको अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।” अदालत ने पुलिस को 2 मार्च तक रणवीर सिंह की गिरफ्तारी से रोक दिया, लेकिन साथ ही उनकी ‘जुबान फिसलने’ की कड़ी आलोचना की।
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने पर चिंता
अदालत ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि धार्मिक मान्यताओं और देवी-देवताओं से जुड़े विषयों पर टिप्पणी करते समय संवेदनशीलता बरतना जरूरी है। जस्टिस ने कहा कि यदि किसी देवी के बारे में बात की जा रही है, तो उसे ‘फीमेल घोस्ट’ कहना अनुचित है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी को भी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं है।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि भले ही माफी मांग ली गई हो, लेकिन क्या वह बोले गए शब्दों को पूरी तरह वापस ले सकती है। अदालत ने कहा कि लोग भले ही भूल जाएं, लेकिन इंटरनेट कभी नहीं भूलता और रिकॉर्ड हमेशा बना रहता है।
‘कांतारा’ और देवी चावुंडी का संदर्भ
विवाद की जड़ फिल्म Kantara से जुड़ी है, जिसमें अभिनेता Rishab Shetty ने एक देवी के पात्र को निभाया था। कोर्ट ने कहा कि जब कोई कलाकार देवी चावुंडी जैसे धार्मिक पात्र का अभिनय करता है, तो उस संदर्भ में टिप्पणी करना अत्यंत संवेदनशील विषय है। अदालत के अनुसार, देवी को ‘फीमेल घोस्ट’ कहना और उस किरदार की नकल उतारना निश्चित रूप से लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है।
कलाकारों की जिम्मेदारी पर जोर
अदालत ने अपने अवलोकन में कहा कि लोकप्रियता किसी को कानून से ऊपर नहीं बनाती। कलाकारों को सार्वजनिक मंच पर संयमित और जिम्मेदार भाषा का उपयोग करना चाहिए। विशेष रूप से जब मामला धार्मिक आस्था से जुड़ा हो, तब सावधानी और संवेदनशीलता आवश्यक है।