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लो शुगर का खतरा: क्यों है हाई शुगर से भी ज्यादा गंभीर

आज की भागदौड़ भरी लेकिन शारीरिक रूप से निष्क्रिय जीवनशैली ने कई बीमारियों को जन्म दिया है। घंटों तक कुर्सी पर बैठकर काम करना, अनियमित खानपान और तनावपूर्ण दिनचर्या शरीर के संतुलन को बिगाड़ देती है। इन सबका सीधा असर रक्त में शुगर के स्तर पर पड़ता है, जिससे कम उम्र में ही डायबिटीज जैसी समस्याएं सामने आने लगी हैं। आमतौर पर लोग हाई शुगर को सबसे खतरनाक मानते हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान के अनुसार लो शुगर की स्थिति अधिक घातक साबित हो सकती है।

क्या है हाइपोग्लाइसीमिया?

रक्त में ग्लूकोज की मात्रा जब सामान्य स्तर से काफी नीचे गिर जाती है, तो इस स्थिति को Hypoglycemia कहा जाता है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब शरीर या तो पर्याप्त ग्लूकोज नहीं बना पाता या उसका उपयोग असंतुलित हो जाता है। मस्तिष्क ऊर्जा के लिए मुख्य रूप से ग्लूकोज पर निर्भर रहता है। ऐसे में जब रक्त में ग्लूकोज की मात्रा अत्यधिक कम हो जाती है, तो मस्तिष्क को आवश्यक पोषण नहीं मिल पाता और गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

लो शुगर की स्थिति में व्यक्ति को चक्कर आना, घबराहट, पसीना आना, हाथ कांपना, भ्रम की स्थिति या अचानक बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। गंभीर मामलों में दौरे पड़ना और आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होना भी संभव है। यदि समय पर उपचार न मिले, तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

कब बनती है स्थिति आपातकालीन?

विशेषज्ञों के अनुसार यदि रक्त में ग्लूकोज का स्तर 70 एमजी/डीएल से नीचे पहुंच जाए तो इसे चेतावनी का संकेत माना जाता है। वहीं यदि यह स्तर 40 से 50 एमजी/डीएल के बीच आ जाए, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक हो जाता है। इस स्तर पर शरीर और मस्तिष्क दोनों को गंभीर खतरा होता है।

लो शुगर अक्सर उन लोगों में अधिक देखा जाता है जो डायबिटीज की दवाइयां या इंसुलिन लेते हैं, लेकिन यह अनियमित भोजन, लंबे समय तक उपवास, अत्यधिक व्यायाम या मानसिक तनाव के कारण भी हो सकता है। इसलिए रक्त में ग्लूकोज का संतुलन बनाए रखना अत्यंत जरूरी है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण और बचाव के उपाय

आयुर्वेद के अनुसार शरीर में ऊर्जा का संतुलन बिगड़ने से ऐसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं। अत्यधिक उपवास, भोजन में अनियमितता और मानसिक तनाव ‘वात’ की वृद्धि कर ऊर्जा असंतुलन पैदा कर सकते हैं। इसलिए लंबे समय तक भूखे रहने से बचना चाहिए और नियमित अंतराल पर हल्का भोजन करते रहना चाहिए।

दिनचर्या में मुलेठी का हल्का काढ़ा, खजूर या किशमिश जैसे प्राकृतिक मीठे तत्वों को शामिल करना लाभकारी माना गया है। ये शरीर को त्वरित ऊर्जा प्रदान करते हैं और ग्लूकोज स्तर को स्थिर रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा आहार में कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन का संतुलित संयोजन जरूरी है। यह संयोजन शरीर को स्थायी ऊर्जा देता है और मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बनाए रखने में सहायक होता है।

संतुलित जीवनशैली है सबसे बड़ी सुरक्षा

लो शुगर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है संतुलित और नियमित जीवनशैली अपनाना। समय पर भोजन, पर्याप्त नींद, नियंत्रित व्यायाम और तनाव प्रबंधन शरीर के ग्लूकोज स्तर को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

यह समझना जरूरी है कि हाई शुगर जितना खतरनाक है, उससे कहीं अधिक तत्काल खतरा लो शुगर में छिपा होता है। थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर परिणाम दे सकती है। इसलिए जागरूकता, नियमित जांच और संतुलित आहार ही इस समस्या से बचने का सर्वोत्तम उपाय है।

डिस्क्लेमर:- यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है किसी भी तरह की गंभीर समस्या महसूस होने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सकों से संपर्क करें।