लॉन्च से पहले ही क्यों टल गया अमेरिका का मून मिशन?
एक ओर जहां इसरो अंतरिक्ष अनुसंधान में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, वहीं अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा को अपने महत्वाकांक्षी मून मिशन में एक बार फिर देरी का सामना करना पड़ा है। नासा का बहुप्रतीक्षित Artemis II मिशन 6 मार्च को लॉन्च होने वाला था। इस मिशन के जरिए अमेरिका करीब 50 वर्षों बाद इंसानों को चंद्रमा के करीब ले जाने की तैयारी में था। लेकिन तकनीकी बाधाओं के कारण अब इसकी लॉन्चिंग टाल दी गई है।
आखिर गड़बड़ी कहां हुई?
नासा प्रमुख जारेड इसाकमैन ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी समस्याओं के चलते मार्च में लॉन्च संभव नहीं है। मिशन में देरी की मुख्य वजह हीलियम फ्लो से जुड़ी दिक्कत बताई जा रही है। दरअसल इस मिशन में उपयोग किए जा रहे दुनिया के सबसे शक्तिशाली रॉकेट Space Launch System में हीलियम के बहाव में असामान्यता पाई गई है।
हीलियम रॉकेट के प्रोपल्शन सिस्टम में दबाव को नियंत्रित करने और ईंधन टैंकों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि इसका प्रवाह संतुलित न रहे तो रॉकेट की कार्यक्षमता और सुरक्षा दोनों पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार का जोखिम उठाना उचित नहीं माना जाता, खासकर तब जब मिशन में मानव सवार हों।
रॉकेट और ओरियन की होगी विस्तृत जांच
तकनीकी खामी सामने आने के बाद अब रॉकेट और Orion स्पेसक्राफ्ट को व्हीकल असेंबली बिल्डिंग में वापस भेजा जाएगा। वहां इंजीनियरों की टीम विस्तृत निरीक्षण और आवश्यक मरम्मत का काम करेगी। नासा प्रमुख ने कहा कि भले ही देरी से लोग निराश हों, लेकिन सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1960 के दशक में जब अमेरिका ने अपोलो कार्यक्रम के तहत चंद्रमा पर कदम रखा था, तब भी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। मौजूदा देरी को भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है, जहां जटिल तकनीक और मानवीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना अनिवार्य है।
चीन के साथ बढ़ती स्पेस रेस
आर्टेमिस-2 में देरी अमेरिका के लिए रणनीतिक दृष्टि से भी अहम मानी जा रही है। चीन ने वर्ष 2030 तक चंद्रमा पर मानव मिशन भेजने का लक्ष्य तय किया है और वह अपने चंद्र कार्यक्रम पर तेजी से काम कर रहा है। ऐसे में अमेरिका पर अपने कार्यक्रम को गति देने का दबाव रहा है।
ट्रंप प्रशासन ने भी चीन को पछाड़ने के लिए मिशन को फरवरी-मार्च तक लॉन्च करने की इच्छा जताई थी। हालांकि तकनीकी चुनौतियों के चलते अब इस समयसीमा में बदलाव करना पड़ा है।
क्या है आर्टेमिस-2 मिशन की खासियत?
आर्टेमिस-2 मिशन नासा के चंद्र कार्यक्रम की अहम कड़ी है। इस मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री लगभग 10 दिनों की क्रूड फ्लाईबाई यात्रा पर चंद्रमा की कक्षा के करीब जाएंगे और फिर पृथ्वी पर लौट आएंगे। दल में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं।
यह मिशन भविष्य के Artemis III की तैयारी है, जिसके तहत इंसान दोबारा चंद्रमा की सतह पर कदम रखेगा। नासा का दीर्घकालिक लक्ष्य चंद्रमा को एक स्थायी आधार के रूप में विकसित करना है, ताकि आगे चलकर मंगल ग्रह की मानव यात्रा का मार्ग प्रशस्त किया जा सके।
गौरतलब है कि आर्टेमिस कार्यक्रम में यह पहली देरी नहीं है। इससे पहले आर्टेमिस-1 भी कई बार टल चुका है और हाल ही में वेट ड्रेस रिहर्सल के दौरान लिक्विड हाइड्रोजन लीक जैसी समस्याएं भी सामने आई थीं। ऐसे में फिलहाल सुरक्षा और तकनीकी सुदृढ़ता को प्राथमिकता देते हुए मिशन की नई तारीख तय की जाएगी।