मार्च का महीना और बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम की दस्तक
मार्च का महीना शुरू होने से पहले ही मौसम में बदलाव साफ नजर आने लगता है। दिन में हल्की गर्माहट और रात में ठंडक के कारण कई लोग पंखा चलाकर सोना शुरू कर देते हैं। ऐसे संक्रमण काल में सर्दी-जुकाम और गले की खराश जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। अक्सर लोग तब सतर्क होते हैं जब बीमारी पूरी तरह से पकड़ बना लेती है, जबकि सर्दी-जुकाम के लक्षण लगभग 24 घंटे पहले ही दिखने लगते हैं।
गले में हल्की चुभन, नाक से पानी आना, सिर में भारीपन और शरीर में थकान जैसे संकेत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि शरीर वायरल संक्रमण से लड़ने की तैयारी कर रहा है। यदि इन शुरुआती लक्षणों को पहचानकर समय रहते घरेलू उपाय अपनाए जाएं, तो सर्दी-जुकाम को बढ़ने से रोका जा सकता है।
अदरक और शहद का असरदार मेल
गले के दर्द और बहती नाक की समस्या में अदरक और शहद का संयोजन बेहद लाभकारी माना जाता है। अदरक में मौजूद जिंजरॉल तत्व में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो गले की सूजन को कम करने में मदद करते हैं। एक चम्मच ताजे अदरक के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर दिन में दो से तीन बार सेवन करने से गले की चुभन में राहत मिलती है।
यह मिश्रण गले की नसों को शांत करता है और कफ को पतला करने में सहायक होता है। साथ ही यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाता है, जिससे संक्रमण से जल्दी उबरने में मदद मिलती है।
भाप और नमक के पानी से गरारे
अगर गले में तेज दर्द या खराश महसूस हो रही है, तो हल्के गुनगुने पानी में आधा चम्मच सेंधा नमक मिलाकर गरारे करना बेहद फायदेमंद होता है। नमक के पानी से गरारे करने से गले के ऊतकों में जमा कीटाणु और अतिरिक्त तरल पदार्थ बाहर निकलते हैं, जिससे सूजन कम होती है।
इसके अलावा, गर्म पानी की भाप लेना बंद नाक को खोलने का सरल और प्रभावी उपाय है। भाप लेने से श्वसन मार्ग की सूजन कम होती है और जमा कफ ढीला होकर बाहर निकलने लगता है। इससे सांस लेने में आसानी होती है और सिरदर्द में भी राहत मिलती है।
तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा
तुलसी को आयुर्वेद में अत्यंत गुणकारी औषधि माना गया है। यह वायरल संक्रमण से लड़ने में मदद करती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। 5 से 7 तुलसी के पत्ते, 2 काली मिर्च और एक छोटा टुकड़ा दालचीनी को पानी में उबालकर काढ़ा तैयार किया जा सकता है।
इस काढ़े का सेवन करने से बंद नाक खुलती है और गले की सूजन में कमी आती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को भीतर से मजबूत बनाते हैं और फेफड़ों की सफाई में सहायक होते हैं। नियमित रूप से इसका सेवन करने से सर्दी-जुकाम के लक्षण जल्दी कम हो सकते हैं।
हाइड्रेशन और सावधानियां
बीमारी के दौरान शरीर को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देना बेहद जरूरी है। गुनगुना पानी, हर्बल चाय और हल्का सूप पीते रहने से शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकलते हैं और शरीर हाइड्रेटेड रहता है। ठंडी चीजों, आइसक्रीम और अधिक खट्टे खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए, क्योंकि ये गले की खराश को बढ़ा सकते हैं।
यदि घरेलू उपाय अपनाने के बावजूद तीन दिनों से अधिक समय तक बुखार, तेज सर्दी या सांस लेने में परेशानी बनी रहे, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। समय पर सावधानी और सही घरेलू उपाय अपनाकर बदलते मौसम में होने वाली सर्दी-जुकाम से आसानी से बचा जा सकता है।