विधानसभा में कृषि अनुदान पर चर्चा के बीच गरमाई सियासत
राजस्थान विधानसभा में कृषि और सहकारिता विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया, जब प्रतिपक्ष की ओर से उप नेता रामकेश मीणा ने कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा को लेकर तीखा बयान दे दिया। चर्चा का विषय भले ही विभागीय बजट और योजनाएं थीं, लेकिन सदन में बयानबाजी का केंद्र किरोड़ी लाल मीणा की राजनीतिक भूमिका और भारतीय जनता पार्टी के भीतर उनकी स्थिति बन गई।
रामकेश मीणा ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय जनता पार्टी केवल किरोड़ी लाल मीणा का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्वी राजस्थान में यदि किसी ने भाजपा का नाम लोगों तक पहुंचाया है, तो वह किरोड़ी लाल मीणा ही हैं। उनके अनुसार, जब भी पार्टी पर संकट आया, उसे दूर करने का काम भी किरोड़ी लाल मीणा ने ही किया है।
‘बीजेपी के ताबूत में आखिरी कील’ वाला बयान
अपने भाषण के दौरान रामकेश मीणा यहीं नहीं रुके। उन्होंने सदन में यह तक कह दिया कि यदि कभी बीजेपी के ताबूत में आखिरी कील ठोकी जाएगी, तो वह भी किरोड़ी लाल मीणा ही ठोकेंगे। उनके इस बयान ने सत्ता पक्ष के सदस्यों को असहज कर दिया और सदन में कुछ देर के लिए हलचल का माहौल बन गया।
रामकेश का यह बयान राजनीतिक रूप से बेहद तीखा माना जा रहा है, क्योंकि इसमें उन्होंने एक ही नेता को पार्टी के उत्थान और संभावित पतन दोनों से जोड़ दिया। इससे साफ है कि विपक्ष भाजपा के भीतर संभावित असंतोष और शक्ति संतुलन को मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।
‘किसान का बेटा’ बताकर बढ़ाई भूमिका
अनुदान की मांगों पर चर्चा के लिए रामकेश मीणा को 15 मिनट का समय दिया गया था, लेकिन इस दौरान उन्होंने कृषि मंत्री की राजनीतिक पृष्ठभूमि और संघर्ष को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने किरोड़ी लाल मीणा को किसान का बेटा और पूर्वी राजस्थान का बड़ा नेता बताया। साथ ही यह भी कहा कि मुख्यमंत्री पद की कुर्सी उन्हें मिलनी चाहिए थी, लेकिन पार्टी ने ऐसा नहीं किया।
रामकेश ने यह भी आरोप लगाया कि कृषि विभाग उन्हें दिया गया, लेकिन वह भी अधूरा है। ग्रामीण विकास विभाग मिलने के बाद भी उसके अधिकार सीमित कर दिए गए। इस पर सत्ता पक्ष की ओर से आपत्ति जताई गई। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने सवाल उठाया कि किसी मंत्री के अधिकारों का मुद्दा अनुदान की मांगों की चर्चा में कैसे जोड़ा जा सकता है।
डूंगरी बांध और आंदोलन का जिक्र
रामकेश मीणा ने अपने भाषण में डूंगरी बांध का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इस मामले में भी सरकार किरोड़ी लाल मीणा की ओर ही देख रही है। उन्होंने भाजपा के अन्य नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि यदि किसी में दम है तो वह इस मुद्दे का समाधान करके दिखाए।
उन्होंने यह भी कहा कि किरोड़ी लाल मीणा आंदोलनकारी नेता रहे हैं और कई बार जेल जा चुके हैं। उनके खिलाफ 200 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं, जो उनके संघर्षशील राजनीतिक जीवन का प्रमाण हैं। रामकेश ने तंज कसते हुए पूछा कि भाजपा के अन्य कितने नेता ऐसे हैं जो आंदोलनों के दौरान जेल गए हों।
सियासी संकेत और आगे की राह
विधानसभा में दिया गया यह बयान केवल अनुदान चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने भाजपा के भीतर नेतृत्व और शक्ति संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष जहां किरोड़ी लाल मीणा की भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर भाजपा को असहज करना चाहता है, वहीं सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दे रहा है।