शरीर के लिए जरूरी मिनरल्स की अनदेखी पड़ सकती है भारी
अक्सर लोग स्वास्थ्य की बात करते समय विटामिन की कमी पर ज्यादा ध्यान देते हैं, लेकिन शरीर के संतुलित और सुचारु संचालन के लिए मिनरल्स भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। ये माइक्रो और मैक्रो मिनरल्स शरीर की हड्डियों, मांसपेशियों, नसों, खून और हार्मोनल सिस्टम को सही तरीके से काम करने में मदद करते हैं। कई बार इनकी कमी का पता साधारण ब्लड टेस्ट से चल जाता है, लेकिन शरीर कुछ संकेत पहले ही देना शुरू कर देता है। इन संकेतों को समय रहते पहचान कर खानपान में बदलाव करना जरूरी होता है।
क्रोमियम और मैंगनीज की कमी के संकेत
क्रोमियम शरीर में ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर शरीर की शुगर मैनेज करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे अचानक वजन घटने या थकान जैसी समस्या सामने आ सकती है। ऐसे में मशरूम, हरी पत्तेदार सब्जियां, सोयाबीन, सूरजमुखी के बीज, चना, काजू और गुड़ जैसे खाद्य पदार्थ आहार में शामिल करना लाभकारी होता है।
मैंगनीज की कमी बहुत कम मामलों में देखी जाती है, लेकिन यदि यह हो जाए तो हड्डियों के विकास में रुकावट, प्रजनन क्षमता में कमी और ग्लूकोज सहनशीलता में गड़बड़ी हो सकती है। हरी सब्जियां, जामुन, ओट्स, ब्राउन राइस, अनानास और चना इसके अच्छे स्रोत माने जाते हैं।
फ्लोराइड और सोडियम क्लोराइड का संतुलन
फ्लोराइड दांतों की मजबूती के लिए जरूरी है। इसकी कमी से दांत कमजोर हो सकते हैं और कैविटी का खतरा बढ़ जाता है। वहीं सोडियम क्लोराइड यानी नमक की कमी आमतौर पर भोजन की कमी से नहीं, बल्कि शरीर में तरल असंतुलन के कारण होती है। अधिक पसीना आना, उल्टी या दस्त के कारण शरीर में नमक का स्तर घट सकता है। ऐसे में पानी और नमक के संतुलित सेवन पर ध्यान देना आवश्यक है।
पोटैशियम और आयोडीन की अहम भूमिका
पोटैशियम मांसपेशियों और दिल की धड़कन को संतुलित रखने में मदद करता है। इसकी कमी अक्सर उल्टी, दस्त या अधिक पेशाब के कारण हो सकती है। कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन और अनियमित धड़कन इसके लक्षण हो सकते हैं। शकरकंद, टमाटर, गाजर, पालक, केला, खरबूजा, आलू, खजूर, किशमिश और मछली पोटैशियम के अच्छे स्रोत हैं।
आयोडीन शरीर के विकास और दिमागी कार्यों के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसकी कमी से थायरॉयड ग्रंथि प्रभावित हो सकती है और गले के सामने सूजन दिखाई दे सकती है। आयोडीन युक्त नमक, समुद्री शैवाल, अंडे और हरी सब्जियां इसके प्रमुख स्रोत हैं।
मैग्नीशियम और जिंक की कमी के प्रभाव
मैग्नीशियम शरीर की सैकड़ों जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं में शामिल होता है। इसकी कमी से मांसपेशियों में ऐंठन, थकान और मानसिक अस्थिरता हो सकती है। दालें, मेवे, बीज, साबुत अनाज, फल और एवोकाडो इसके अच्छे स्रोत हैं।
जिंक रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत रखने में मदद करता है। इसकी कमी से बार-बार संक्रमण होना, घाव का देर से भरना और स्वाद में बदलाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सीप, मांस, बीन्स और मेवे जिंक से भरपूर होते हैं।
आयरन और सेलेनियम की आवश्यकता
आयरन रेड ब्लड सेल्स के निर्माण के लिए जरूरी है। इसकी कमी से एनीमिया हो सकता है, जिसमें थकान, चक्कर आना और कमजोरी प्रमुख लक्षण हैं। बादाम, सूखे मेवे, राजमा, पालक, ब्रोकली, कद्दू के बीज और मांस आयरन के अच्छे स्रोत हैं।
सेलेनियम की कमी कम देखने को मिलती है, लेकिन यदि यह हो जाए तो थकान, मांसपेशियों की कमजोरी और प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ सकती है। ब्राजील नट्स, मशरूम, साबुत अनाज, सैल्मन और अंडे इसके महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं।