NSUI की कमान राजस्थान के विनोद जाखड़ के हाथ, 55 साल में पहली बार मिला यह मौका
राजस्थान की छात्र राजनीति से निकला एक नाम अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने विनोद जाखड़ को नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह निर्णय संगठन के 55 वर्षों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पहली बार राजस्थान से किसी छात्र नेता को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस नियुक्ति ने जहां राज्य के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं में उत्साह पैदा किया है, वहीं इसके साथ एक व्यावहारिक सवाल भी चर्चा में है कि क्या इस पद के लिए अलग से वेतन मिलता है या यह पूरी तरह संगठनात्मक दायित्व है।
55 वर्षों के इतिहास में नया अध्याय
एनएसयूआई, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का छात्र संगठन है, जिसकी स्थापना युवाओं और विद्यार्थियों को राजनीति से जोड़ने तथा छात्र हितों की आवाज उठाने के उद्देश्य से की गई थी। अब तक इसके राष्ट्रीय नेतृत्व की कमान देश के विभिन्न राज्यों के नेताओं के हाथों में रही है। ऐसे में विनोद जाखड़ की नियुक्ति को राजस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह फैसला केवल एक संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि राज्य की छात्र राजनीति को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला कदम भी माना जा रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष से राष्ट्रीय अध्यक्ष तक का सफर
विनोद जाखड़ को जनवरी 2024 में राजस्थान एनएसयूआई का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने छात्र हितों से जुड़े कई मुद्दों पर सक्रियता दिखाई। राजस्थान विश्वविद्यालय में विभिन्न वैचारिक कार्यक्रमों के विरोध से लेकर छात्रसंघ चुनावों की बहाली की मांग तक, उन्होंने कई आंदोलनों का नेतृत्व किया। इन आंदोलनों के दौरान उन्हें कई बार हिरासत में भी लिया गया। उनकी आक्रामक शैली और संगठन के प्रति सक्रियता ने उन्हें छात्र राजनीति में एक मजबूत चेहरा बना दिया। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उनके कार्यों को गंभीरता से लिया और अंततः उन्हें राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी सौंपी गई।
सैलरी को लेकर उठे सवाल
नियुक्ति के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा कि क्या एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष को कांग्रेस पार्टी की ओर से अलग से वेतन दिया जाता है। जानकारी के अनुसार, एनएसयूआई एक राजनीतिक दल का छात्र संगठन है और इसके अधिकांश पद संगठनात्मक एवं स्वैच्छिक माने जाते हैं। यह कोई संवैधानिक या सरकारी पद नहीं होता, इसलिए आमतौर पर इन पदों के लिए नियमित वेतन की व्यवस्था नहीं होती है।
राजनीतिक दलों में कार्यकर्ता और पदाधिकारी संगठन को मजबूत करने, आंदोलन चलाने और राजनीतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए काम करते हैं। वेतन की व्यवस्था आमतौर पर स्थायी कार्यालय कर्मचारियों या विशेष प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने वाले पदों के लिए होती है। ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद भी औपचारिक वेतन वाला पद नहीं माना जाता, बल्कि यह संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय और प्रभावी बनाने की जिम्मेदारी से जुड़ा होता है।
संगठनात्मक जिम्मेदारी और राजनीतिक अवसर
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष का दायित्व छात्र मुद्दों को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना, संगठन का विस्तार करना और युवाओं को कांग्रेस की विचारधारा से जोड़ना होता है। यह पद राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इसका स्वरूप अधिकतर संगठनात्मक और रणनीतिक होता है। विनोद जाखड़ के सामने अब चुनौती यह होगी कि वे छात्र राजनीति में अपनी सक्रिय छवि को राष्ट्रीय स्तर पर भी कायम रखें और संगठन को नई दिशा दें।