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रमजान में इफ्तार की शुरुआत खजूर से क्यों? परंपरा के साथ सेहत का गहरा संबंध

 

पवित्र रमजान का महीना मुस्लिम समुदाय के लिए इबादत, संयम और आत्मिक शुद्धि का समय होता है। इस दौरान रोजा इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक माना जाता है, जिसमें सुबह से लेकर सूर्यास्त तक खाने-पीने से परहेज किया जाता है। जैसे ही सूरज ढलता है, इफ्तार के साथ रोजा खोला जाता है। दुनिया भर के मुसलमानों में एक परंपरा बेहद प्रचलित है—रोजा खजूर से खोलना। यह केवल धार्मिक आस्था या परंपरा का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी तर्क भी छिपा है।

पैगंबर की सुन्नत और धार्मिक महत्व

इस्लामी मान्यता के अनुसार, पैगंबर मोहम्मद ने खजूर से इफ्तार करने की सलाह दी थी। हदीसों में उल्लेख मिलता है कि वे ताजा या सूखे खजूर से रोजा खोला करते थे। कुरआन में भी खजूर का कई स्थानों पर उल्लेख मिलता है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। यही कारण है कि रमजान के महीने में खजूर की मांग अचानक बढ़ जाती है और बाजारों में इसकी विशेष तैयारी देखने को मिलती है।

लंबी भूख के बाद तुरंत ऊर्जा का स्रोत

रोजे के दौरान शरीर कई घंटों तक बिना भोजन और पानी के रहता है। ऐसे में सूर्यास्त के समय शरीर को तुरंत ऊर्जा की आवश्यकता होती है। न्यूट्रिशन विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे उपवास के बाद शरीर सबसे पहले ग्लूकोज की मांग करता है, क्योंकि यही ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। खजूर में प्राकृतिक शर्करा जैसे ग्लूकोज और फ्रक्टोज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो तेजी से रक्त में घुलकर ऊर्जा प्रदान करते हैं। इससे शरीर को तुरंत ताकत मिलती है और कमजोरी या चक्कर जैसी समस्या से राहत मिलती है।

खजूर में साधारण शर्करा के साथ-साथ जटिल कार्बोहाइड्रेट भी होते हैं, जो धीरे-धीरे पचते हैं और शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देते रहते हैं। इस प्रकार यह तुरंत और स्थायी ऊर्जा का संतुलित स्रोत बन जाता है।

विटामिन, मिनरल और हाइड्रेशन का संतुलन

खजूर केवल मीठा फल नहीं है, बल्कि यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें विटामिन ए, के और बी6 के साथ-साथ आयरन की अच्छी मात्रा पाई जाती है। यह खून की कमी को दूर करने और शरीर को आवश्यक पोषण देने में सहायक है। इसके अलावा इसमें पोटैशियम जैसे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट भी मौजूद होते हैं, जो शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।

भारत में आमतौर पर लोग खजूर के साथ पानी पीकर इफ्तार करते हैं। इससे शरीर को एक साथ ऊर्जा और हाइड्रेशन मिलता है। लंबे समय तक पानी न पीने के बाद यह संयोजन शरीर को संतुलित करने में मदद करता है।

पाचन तंत्र के लिए लाभकारी

रोजे के दौरान लंबे समय तक भोजन न करने से पाचन क्रिया की गति धीमी हो सकती है। कई लोगों को कब्ज या पेट फूलने जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। खजूर में मौजूद फाइबर आंतों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है और पाचन को सहज बनाता है। यह पेट को धीरे-धीरे भोजन के लिए तैयार करता है, जिससे भारी भोजन लेने पर भी असुविधा कम होती है।

परंपरागत रूप से कई लोग तीन या पांच खजूर खाकर पहले नमाज अदा करते हैं और उसके बाद मुख्य भोजन करते हैं। इससे शरीर को संकेत मिल जाता है कि भोजन मिल चुका है और अधिक खाने की प्रवृत्ति कम हो जाती है। इस तरह खजूर न केवल धार्मिक परंपरा को निभाता है, बल्कि संतुलित और स्वस्थ इफ्तार की शुरुआत भी सुनिश्चित करता है।