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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भारत की डिजिटल क्रांति को सराहा 

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में अपने संबोधन के दौरान भारत की डिजिटल क्रांति की सराहना करते हुए मुंबई के एक स्ट्रीट वेंडर की प्रेरक कहानी सुनाई। उन्होंने इस उदाहरण के जरिए बताया कि बीते दस वर्षों में भारत ने किस तरह तकनीक और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन हासिल किया है।

‘नमस्ते’ से की संबोधन की शुरुआत

मैक्रों ने अपने भाषण की शुरुआत ‘नमस्ते’ कहकर की और भारत की मेजबानी के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि 2024 के अपने राजकीय दौरे के बाद इस महत्वपूर्ण एआई समिट में दोबारा भारत आकर उन्हें बेहद खुशी हो रही है। उन्होंने भारत को एक “शानदार देश” और मुंबई को “ऊर्जा से भरा शहर” बताया। मैक्रों ने कहा कि यह समिट सिर्फ तकनीक पर चर्चा का मंच नहीं, बल्कि भविष्य की वैश्विक दिशा तय करने का अवसर है।

मुंबई के रेहड़ी वाले की कहानी

अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति मैक्रों ने एक मार्मिक कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि करीब दस साल पहले मुंबई का एक रेहड़ी वाला व्यक्ति बैंक खाता नहीं खोल पाता था क्योंकि उसके पास स्थायी पता, जरूरी दस्तावेज या औपचारिक पहचान नहीं थी। वह पूरी तरह नकद लेनदेन पर निर्भर था और औपचारिक अर्थव्यवस्था से बाहर था।

आज वही व्यक्ति अपने मोबाइल फोन के जरिए तुरंत और मुफ्त डिजिटल भुगतान स्वीकार कर रहा है। मैक्रों ने कहा कि यह सिर्फ तकनीक की कहानी नहीं, बल्कि एक सभ्यता के परिवर्तन की कहानी है। यह बदलाव दर्शाता है कि डिजिटल पहचान और भुगतान व्यवस्था ने समाज के सबसे निचले पायदान तक अवसर पहुंचाए हैं।

भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बना मिसाल

मैक्रों ने भारत की डिजिटल उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि 140 करोड़ लोगों के लिए एक व्यापक डिजिटल पहचान प्रणाली तैयार करना असाधारण उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम हर महीने लगभग 20 अरब ट्रांजैक्शन प्रोसेस कर रहा है। साथ ही, देश में 50 करोड़ से अधिक डिजिटल हेल्थ आईडी जारी की जा चुकी हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया के किसी और देश ने इतने बड़े पैमाने पर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण नहीं किया है। भारत ने यह साबित कर दिया कि बड़े पैमाने पर समावेशी डिजिटल बदलाव संभव है।

एआई में वैश्विक प्रतिस्पर्धा और रणनीतिक स्वायत्तता

मैक्रों ने पिछले वर्ष पेरिस में आयोजित एआई एक्शन समिट का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और फ्रांस ने मिलकर एआई के जिम्मेदार और मानव-केंद्रित उपयोग के लिए वैश्विक सिद्धांत तय किए थे। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्वास्थ्य, ऊर्जा, कृषि, मोबिलिटी और सार्वजनिक सेवाओं में व्यापक परिवर्तन ला सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि एआई अब रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का बड़ा क्षेत्र बन चुका है और बड़ी टेक कंपनियां और अधिक शक्तिशाली हो गई हैं। इसके बावजूद, नवाचार, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता का रास्ता अभी भी खुला है। मैक्रों ने भारत द्वारा छोटे, टास्क-विशिष्ट लैंग्वेज मॉडल विकसित करने और स्टार्टअप्स को समर्थन देने के लिए 38,000 सरकारी फंडेड जीपीयू लगाने के फैसले को “सॉवरेन चॉइस” बताया।

भारत-फ्रांस साझेदारी का भविष्य

अपने संबोधन के अंत में मैक्रों ने कहा कि एक समय दुनिया ने भारत से कहा था कि 1.4 अरब लोगों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ना असंभव है, लेकिन भारत ने इसे संभव कर दिखाया। आज कुछ लोग कहते हैं कि एआई का खेल केवल बड़े देशों और बड़ी कंपनियों के लिए है, लेकिन भारत और फ्रांस मिलकर इस धारणा को भी बदल सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भविष्य उन्हीं का होगा जो नवाचार को जिम्मेदारी और इंसानियत के साथ जोड़ेंगे। भारत और फ्रांस, यूरोप तथा अन्य साझेदार देशों के साथ मिलकर एआई के ऐसे भविष्य का निर्माण कर सकते हैं जो तकनीक को मानव कल्याण के केंद्र में रखे।