प्रदूषण के दौर में नाक और श्वसन तंत्र की जलनेति क्रिया करेगी सुरक्षा
आज के समय में बढ़ता वायु प्रदूषण, धूल-मिट्टी और एलर्जी की समस्या लगभग हर शहर में आम हो चुकी है। घर से बाहर निकलते ही धुआं और जहरीले कण सांसों के साथ शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे नाक बंद रहना, बार-बार छींक आना, साइनस का दर्द, सिर भारी लगना और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए Ministry of AYUSH ने प्राचीन योगिक शुद्धिकरण क्रिया ‘जलनेति’ को अपनाने की सलाह दी है। मंत्रालय का कहना है कि यह एक सरल, प्राकृतिक और प्रभावी विधि है, जो नासिका मार्ग की गहराई से सफाई कर श्वसन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती है।
क्या है जलनेति क्रिया
जलनेति योग की षट्कर्म क्रियाओं में से एक महत्वपूर्ण शुद्धिकरण प्रक्रिया है। इसमें गुनगुने नमक मिले पानी से नाक के दोनों मार्गों को साफ किया जाता है। इसके लिए एक विशेष पात्र का उपयोग किया जाता है, जिसे नेति पॉट कहा जाता है। यह प्रक्रिया नाक के अंदर जमा धूल, प्रदूषण के कण, एलर्जी उत्पन्न करने वाले तत्वों और अतिरिक्त बलगम को बाहर निकालने में सहायक होती है। नियमित अभ्यास से नासिका मार्ग खुल जाते हैं और श्वसन तंत्र अधिक सुचारु रूप से कार्य करता है।
जलनेति करने की सही विधि
जलनेति करने के लिए सबसे पहले कागासन मुद्रा में बैठें और पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखें। शरीर को थोड़ा आगे की ओर झुकाएं और सिर को उस नासिका के विपरीत दिशा में झुकाएं, जिससे सांस आसानी से आ रही हो। नेति पॉट की टोंटी सक्रिय नासिका में लगाएं। मुंह को हल्का खोलकर मुंह से सांस लेते और छोड़ते रहें। धीरे-धीरे पानी डालें, जो एक नासिका से अंदर जाकर दूसरी से बाहर निकलेगा। आधा पात्र खाली होने पर नाक साफ करें और यही प्रक्रिया दूसरी नासिका से दोहराएं। अंत में कपालभाति प्राणायाम करें ताकि नाक में बची हुई पानी की बूंदें पूरी तरह बाहर निकल जाएं।
सावधानियां जिनका रखना जरूरी है ध्यान
जलनेति करते समय कुछ सावधानियां बेहद आवश्यक हैं। पानी गुनगुना होना चाहिए, न ज्यादा गर्म और न ही ठंडा। सामान्यतः एक लीटर पानी में लगभग आधा चम्मच नमक मिलाना उचित माना जाता है। पहली बार यह क्रिया किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में करना बेहतर होता है। यदि नाक में गंभीर संक्रमण हो, हाल ही में सर्जरी हुई हो या किसी प्रकार की चिकित्सकीय समस्या हो, तो पहले डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
जलनेति के प्रमुख फायदे
नियमित जलनेति से नाक और साइनस की गहरी सफाई होती है, जिससे साइनसाइटिस और एलर्जी में राहत मिल सकती है। यह सर्दी-जुकाम, नाक बंद रहने और अत्यधिक बलगम की समस्या को कम करने में सहायक मानी जाती है। श्वसन तंत्र को साफ रखने के कारण दमा और ऊपरी श्वसन संक्रमण में भी लाभ देखा गया है। नाक के मार्ग खुलने से सिरदर्द और माइग्रेन में भी राहत मिल सकती है।
इसके अतिरिक्त जलनेति से ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है, जिससे मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता में वृद्धि होती है। योग शास्त्रों के अनुसार नियमित अभ्यास आंखों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना गया है।
दैनिक जीवन में शामिल करने की सलाह
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही विधि और सावधानियों के साथ नियमित रूप से किया जाए, तो जलनेति श्वसन तंत्र को स्वच्छ रखने के साथ-साथ समग्र स्वास्थ्य में भी सुधार ला सकती है। खासकर प्रदूषित वातावरण में रहने वाले लोगों के लिए यह एक प्रभावी प्राकृतिक उपाय साबित हो सकता है।