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चांदी में फिर लौटी तेजी, एक दिन में 8 हजार रुपये से ज्यादा की छलांग

 

हाल के दिनों में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद तेज गिरावट का सामना कर रही चांदी ने 18 फरवरी को एक बार फिर जोरदार वापसी की। Multi Commodity Exchange of India यानी एमसीएक्स पर चांदी के दाम 8,316 रुपये यानी 3.63 प्रतिशत उछलकर 2,37,099 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गए। यह बढ़त ऐसे समय आई है जब बाजार में हालिया गिरावट के बाद निवेशकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह तेजी लंबी अवधि तक टिकेगी या फिर यह केवल अल्पकालिक रिकवरी है।

गिरावट के बाद मजबूत रिकवरी

पिछले सप्ताहों में चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई थी। सुरक्षित निवेश के तौर पर देखी जाने वाली कीमती धातुओं में उस समय नरमी आई जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों में आंशिक कमी के संकेत मिले। खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच जेनेवा में हुई बातचीत में परमाणु मुद्दों पर प्रगति की खबरों ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। इससे निवेशकों का रुख जोखिम वाले एसेट्स की ओर बढ़ा और कीमती धातुओं पर दबाव बना।

हालांकि, वैश्विक अनिश्चितता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। दुनिया भर में आर्थिक सुस्ती, महंगाई और केंद्रीय बैंकों की नीतियों को लेकर बनी आशंकाओं ने सोना-चांदी को ऊंचे दायरे में बनाए रखा है। यही वजह है कि गिरावट के बाद इन धातुओं में फिर से खरीदारी देखने को मिल रही है।

सोने में भी दिखी मजबूती

चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी उछाल दर्ज किया गया। एमसीएक्स पर सोना 1,848 रुपये यानी करीब 1.22 प्रतिशत चढ़कर 1,53,266 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। भारत और चीन जैसे बड़े बाजारों में गोल्ड ईटीएफ की मांग मजबूत बनी हुई है। जनवरी में भारत द्वारा सोने के आयात में बढ़ोतरी भी दर्ज की गई, जिससे संकेत मिलता है कि फिजिकल डिमांड अभी भी मजबूत है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोना और चांदी दोनों की कीमतें आगे भी वैश्विक आर्थिक संकेतों, डॉलर की चाल, ब्याज दरों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम से प्रभावित होती रहेंगी।

क्या यह तेजी टिकेगी?

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, यदि वैश्विक तनावों में कमी आती है तो सुरक्षित निवेश वाली धातुओं में सट्टात्मक मांग घट सकती है, जिससे कीमतों पर दबाव बन सकता है। हालांकि, चांदी के मामले में औद्योगिक मांग भी एक बड़ा कारक है। सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी की बढ़ती खपत इसे अतिरिक्त समर्थन देती है।

इसके अलावा भारत और चीन जैसे देशों में शादी और त्योहारों के सीजन के दौरान भौतिक खरीद में तेजी आती है। गिरावट के समय निवेशक बार और कॉइन की खरीद बढ़ाते हैं, जिससे कीमतों को निचला आधार मिलता है। यही वजह है कि तेज गिरावट के बावजूद कीमतें पूरी तरह टूटती नहीं हैं।

निवेशकों के लिए क्या रणनीति?

विशेषज्ञों का सुझाव है कि मौजूदा परिस्थितियों में संतुलित और दीर्घकालिक रणनीति अपनाना समझदारी होगी। शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन मजबूत फिजिकल डिमांड और औद्योगिक उपयोग चांदी को समर्थन देते रहेंगे। निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे जल्दबाजी में मंदी या तेजी का निष्कर्ष न निकालें, बल्कि वैश्विक संकेतकों पर नजर रखते हुए चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनाएं।