ट्रंप की चीन यात्रा से पहले तिब्बत पर अमेरिकी दांव
अमेरिका ने तिब्बत के मुद्दे पर एक अहम कदम उठाते हुए विशेष दूत की नियुक्ति की घोषणा की है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने 17 फरवरी को बताया कि तिब्बतियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष समन्वयक नियुक्त किया गया है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब राष्ट्रपति Donald Trump की चीन यात्रा की चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि यह कदम चीन को कूटनीतिक संदेश देने के साथ-साथ मानवाधिकारों के मुद्दे पर अमेरिका की स्थिति को स्पष्ट करता है।
राइली बार्न्स को मिली जिम्मेदारी
रुबियो ने बताया कि लोकतंत्र, मानवाधिकार और श्रम मामलों के सहायक विदेश मंत्री राइली बार्न्स को तिब्बत मामलों के लिए अमेरिका का विशेष समन्वयक नियुक्त किया गया है। यह घोषणा तिब्बती नववर्ष ‘लोसार’ के अवसर पर जारी संदेश में की गई। अपने बयान में रुबियो ने कहा कि अमेरिका तिब्बतियों के उन अधिकारों का समर्थन करता रहेगा जिन्हें छीना नहीं जा सकता। उन्होंने तिब्बतियों की अलग भाषा, संस्कृति और धार्मिक पहचान की रक्षा के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता दोहराई।
चीन यात्रा से पहले कूटनीतिक संकेत
विशेष दूत की नियुक्ति को चीन के लिए एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है। तिब्बत चीन के लिए एक संवेदनशील मुद्दा है और वह इसे अपना आंतरिक मामला मानता है। ऐसे में ट्रंप की संभावित चीन यात्रा से पहले तिब्बत पर यह पहल दोनों देशों के बीच बातचीत के स्वर को प्रभावित कर सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अमेरिका की उस नीति को दर्शाता है जिसमें वह रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ मानवाधिकारों के सवाल भी उठाना चाहता है।
दलाई लामा के उत्तराधिकार पर अमेरिका की चिंता
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी नीति निर्माताओं की प्राथमिकताओं में तिब्बती बौद्धों के आध्यात्मिक प्रमुख Dalai Lama के अगले पुनर्जन्म की प्रक्रिया की रक्षा करना शामिल रहा है। अमेरिका को आशंका है कि चीन इस धार्मिक परंपरा में हस्तक्षेप कर अपने समर्थक उत्तराधिकारी को स्थापित करने की कोशिश कर सकता है। वर्तमान दलाई लामा लगभग 90 वर्ष के हैं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिब्बतियों के अधिकारों की लगातार वकालत की है। अमेरिका का मानना है कि दलाई लामा के उत्तराधिकार का निर्णय तिब्बती परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ही होना चाहिए।
कानून के तहत अनिवार्य पद
तिब्बत मामलों के विशेष समन्वयक का पद 2002 में अमेरिकी संसद द्वारा पारित कानून के तहत अनिवार्य किया गया था। इसके बाद से अलग-अलग प्रशासन ने वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी के रूप में यह पद सौंपा है। हालांकि, ट्रंप के पहले कार्यकाल में इस नियुक्ति में देरी हुई थी, जिसे लेकर आलोचना भी हुई थी।
मानवाधिकारों पर सख्त रुख
सीनेटर रहते हुए मार्को रुबियो चीन में मानवाधिकारों के प्रबल समर्थक रहे हैं। उन्होंने चीन के शिनजियांग क्षेत्र में उइगर मुस्लिम अल्पसंख्यकों के समर्थन में कानून को आगे बढ़ाया था, जिसके तहत जबरन मजदूरी से जुड़े सामान पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया गया। तिब्बत पर विशेष दूत की नियुक्ति को भी उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें अमेरिका चीन के साथ संबंधों में मानवाधिकारों के मुद्दे को प्रमुखता देता रहा है।