राजस्थान विधानसभा में ‘राज्यमाता’ विवाद पर बवाल, सदन दो बार स्थगित
राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को गाय को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने की मांग को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। प्रश्नकाल के दौरान उठा यह मुद्दा देखते ही देखते सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक में बदल गया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक और बाद में आधे घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी। इस दौरान कांग्रेस विधायकों ने पोस्टर लहराए और वेल में उतरकर नारेबाजी की, जबकि भाजपा विधायक भी आक्रामक रुख में नजर आए।
प्रश्नकाल में उठा मुद्दा, सरकार से पूछा गया स्पष्ट जवाब
विवाद की शुरुआत भाजपा विधायक बालमुकुंदाचार्य द्वारा पूछे गए एक सवाल से हुई। उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि गाय को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार की ओर से जवाब देते हुए गौ पालन मंत्री जोराराम कुमावत ने गाय से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक आस्थाओं का उल्लेख किया।
इस जवाब से असंतुष्ट बालमुकुंदाचार्य ने स्पीकर वासुदेव देववानी से कहा कि उनका सवाल धार्मिक मान्यताओं पर नहीं था, बल्कि उन्होंने स्पष्ट रूप से यह पूछा था कि सरकार इस संबंध में क्या ठोस कदम उठा रही है। इस पर स्पीकर ने मंत्री से सीधे सवाल का उत्तर देने को कहा।
सरकार ने प्रस्ताव न होने की बात कही
मंत्री कुमावत ने स्पष्ट किया कि विभाग के पास गाय को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इस पर बालमुकुंदाचार्य ने महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वहां ऐसा दर्जा दिया जा चुका है तो राजस्थान में क्यों नहीं दिया जा सकता। मंत्री ने जवाब में कहा कि यदि अन्य राज्यों में ऐसा प्रावधान है तो वहां से रिकॉर्ड मंगवाकर अध्ययन किया जाएगा कि इसे किस प्रकार लागू किया गया।
नेता प्रतिपक्ष की टिप्पणी से बढ़ा विवाद
इस चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यह गंभीर स्थिति है जब खुद सत्तारूढ़ दल का विधायक सरकार के जवाब से असंतुष्ट है। उन्होंने प्रदेश में कथित गौ हत्याओं का मुद्दा उठाया और हाल ही में जयपुर की हिंगौनिया गौशाला में एक गाय का सिर काटकर लटकाए जाने की घटना का जिक्र किया। जूली ने आरोप लगाया कि इस घटना में भाजपा कार्यकर्ताओं की संलिप्तता थी और भाजपा विधायक उन्हें बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
इन आरोपों पर सिविल लाइंस से भाजपा विधायक गोपाल शर्मा अपनी सीट से उठकर वेल की ओर बढ़ने लगे। स्पीकर ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे आगे बढ़ते रहे। सरकार के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग को भी उन्हें बैठाने के लिए कहा गया, पर स्थिति नियंत्रण में नहीं आ सकी।
नारेबाजी और दो बार स्थगन
विवाद बढ़ने पर कांग्रेस विधायक पोस्टर लेकर वेल में उतर गए और नारेबाजी करने लगे। हंगामे के बीच स्पीकर ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। पुनः कार्यवाही शुरू होने पर भी कांग्रेस विधायक वेल में डटे रहे और नारेबाजी जारी रखी। इसके बाद सभापति संदीप शर्मा ने सदन को आधे घंटे के लिए फिर स्थगित कर दिया।
भाजपा विधायक के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने भाजपा विधायक गोपाल शर्मा के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस के सचेतक रफीक खान ने स्पीकर को उनके खिलाफ औपचारिक शिकायत भी सौंप दी है।