एनएसयूआई राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के इंटरव्यू से सचिन पायलट गुट के निर्मल चौधरी बाहर
National Students' Union of India के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए दिल्ली में इंटरव्यू प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इंटरव्यू के लिए तैयार किए गए 6 से 8 नामों के पैनल में से एक प्रमुख दावेदार का नाम अचानक बाहर कर दिया गया। यह नाम था निर्मल चौधरी का, जिन्हें राजस्थान की राजनीति में एक सक्रिय युवा चेहरे के तौर पर देखा जाता है। पैनल से नाम हटने के बाद सियासी चर्चाएं और अटकलें तेज हो गई हैं।
निर्मल चौधरी को प्रदेश की राजनीति में Sachin Pilot गुट के करीबी नेताओं में गिना जाता है। ऐसे में उनके नाम का अंतिम पैनल में शामिल न होना राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
विनोद जाखड़ को मिला मौका
दिल्ली में आयोजित हो रहे इंटरव्यू में राजस्थान से विनोद जाखड़ का नाम पैनल में शामिल किया गया है। वर्तमान में वे एनएसयूआई राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष हैं। इससे पहले भी उनका नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए बने पैनल में शामिल हो चुका है, हालांकि पिछली बार उनका चयन नहीं हो पाया था।
इस बार एक बार फिर उन्हें मौका दिया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि संगठन स्तर पर उनके नाम पर सहमति बनती दिखाई दे रही है। वहीं दूसरी ओर निर्मल चौधरी का नाम सूची से बाहर होने के कारण अंदरखाने असंतोष और खींचतान की चर्चाएं तेज हैं।
गुटबाजी और अंदरूनी खींचतान की चर्चा
राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि निर्मल चौधरी को पैनल से बाहर किए जाने के पीछे केवल संगठनात्मक कारण नहीं, बल्कि गुटबाजी भी एक बड़ी वजह हो सकती है। बताया जा रहा है कि उनका एक विधायक से मतभेद चल रहा था, जो उसी गुट से जुड़े बताए जाते हैं। इस अनबन का असर उनके दावेदारी पर पड़ा हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, संगठन के कुछ पदाधिकारियों ने यह भी शिकायत की थी कि निर्मल चौधरी कांग्रेस में सक्रिय रहते हुए भी भाजपा से जुड़े कुछ लोगों के संपर्क में थे। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कहा जा रहा है कि इस संबंध में शिकायतें दिल्ली तक पहुंची थीं। इन्हीं कारणों को आधार बनाकर उनका नाम इंटरव्यू पैनल से हटाया गया।
सोशल मीडिया की ‘रीलबाजी’ भी बनी चर्चा का विषय
निर्मल चौधरी सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता और रील्स को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। उनके बयान, अंदाज और राजनीतिक टिप्पणियां सोशल मीडिया पर वायरल होती रही हैं। हालांकि संगठन के अंदर यह चर्चा है कि उनकी यही ‘रीलबाजी’ उनके लिए नुकसानदायक साबित हुई।
कुछ नेताओं का मानना है कि छात्र संगठन के शीर्ष पद के लिए गंभीर और संतुलित छवि को प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में सोशल मीडिया पर अधिक आक्रामक या विवादित अंदाज संगठनात्मक निर्णय में बाधा बन सकता है।
सियासी संकेत और आगे की रणनीति
निर्मल चौधरी का नाम पैनल से बाहर होना केवल एक संगठनात्मक निर्णय नहीं, बल्कि राजस्थान की राजनीति के बदलते समीकरणों का संकेत भी माना जा रहा है। छात्र राजनीति में गुटीय संतुलन और शीर्ष नेतृत्व की पसंद को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया हो सकता है।