कूनो से बारां तक: चीता KP2 ने छेड़ी नई बहस, राजस्थान में नेचुरल कॉरिडोर बनाने पर विचार
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकलकर बार-बार राजस्थान की सीमा में प्रवेश कर रहे चीता KP2 ने दोनों राज्यों के वन विभागों के बीच नई चर्चा को जन्म दे दिया है। यह नर चीता तीसरी बार मध्य प्रदेश की सरहद पार कर राजस्थान के बारां जिले के शाहबाद और किशनगंज वन क्षेत्र में पहुंचा है। खास बात यह है कि इस बार राजस्थान सरकार उसे वापस भेजने के बजाय, उसके लिए सुरक्षित ‘नेचुरल कॉरिडोर’ विकसित करने की संभावना पर विचार कर रही है।
बार-बार सीमा पार कर रहा है KP2
दिसंबर 2025 में भी यह चीता करीब 15 दिनों तक राजस्थान के जंगलों में रहा था। अब तक दो बार मध्य प्रदेश की वन विभाग की टीमें उसे ट्रेंकुलाइज कर वापस कूनो ले जा चुकी हैं। इसके बावजूद यह चीता फिर से अपने दम पर राजस्थान के बारां क्षेत्र में लौट आया। इस घटनाक्रम ने वन्यजीव विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है।
हाड़ौती क्षेत्र के वाइल्डलाइफ विशेषज्ञों ने इस बात का विरोध जताया कि बार-बार ट्रेंकुलाइज कर उसे वापस भेजना उचित नहीं है। उन्होंने यह मुद्दा मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक तक भी पहुंचाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि शाहबाद का घना जंगल और यहां की आबोहवा इस चीते के लिए अनुकूल प्रतीत हो रही है।
नेचुरल रूट और कॉरिडोर पर चर्चा
हाल ही में बारां प्रवास के दौरान मीडिया से बातचीत में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर से जब पूछा गया कि क्या चीते को बार-बार बेहोश कर मध्य प्रदेश भेजा जाएगा, तो उन्होंने कहा कि इस विषय पर वन विभाग से चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि चीते का बार-बार आना यह संकेत देता है कि वह इस क्षेत्र को सुरक्षित और उपयुक्त मान रहा है।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वन्यजीवों को एक राज्य से दूसरे राज्य में आने-जाने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। यदि चीता अपने प्राकृतिक मार्ग से यहां पहुंच रहा है और यहां रहना चाहता है, तो उसके संरक्षण के लिए एक सुरक्षित कॉरिडोर विकसित करने पर विचार किया जा सकता है। वन विभाग फिलहाल उसके मूवमेंट पैटर्न और प्राकृतिक मार्ग का अध्ययन कर रहा है।
जामली वन खंड में मौजूदगी और निगरानी
वर्तमान में चीता KP2 जामली वन खंड में मौजूद है। 14 फरवरी से दोनों राज्यों की वन टीमें उसकी सैटेलाइट कॉलर और जमीनी स्तर पर निगरानी कर रही हैं। विशेषज्ञ यह अध्ययन कर रहे हैं कि क्या शाहबाद और किशनगंज के जंगल चीतों के लिए स्थायी आवास के रूप में विकसित किए जा सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने वन्यजीव संरक्षण और अंतरराज्यीय समन्वय को लेकर नई बहस छेड़ दी है। यदि राजस्थान में नेचुरल कॉरिडोर विकसित होता है, तो यह न केवल चीता संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कदम होगा, बल्कि भविष्य में वन्यजीवों की स्वतंत्र आवाजाही के लिए भी सकारात्मक उदाहरण साबित हो सकता है।