News Image

महाशिवरात्रि का व्रत: आस्था के साथ सावधानी भी जरूरी

महाशिवरात्रि भगवान शिव की उपासना का सबसे पावन पर्व माना जाता है। इस दिन देशभर में शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। श्रद्धालु उपवास रखकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और रात्रि जागरण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि का व्रत रखने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। हालांकि, यह व्रत जितना पुण्यदायी माना जाता है, उतना ही संयम और सावधानी की भी मांग करता है।

व्रत से पहले नियमों की जानकारी जरूरी

किसी भी व्रत को रखने से पहले उसके नियमों और अपनी शारीरिक स्थिति को समझना बेहद आवश्यक होता है। शास्त्रों में भी कहा गया है कि व्रत तभी फलदायी होता है, जब वह श्रद्धा के साथ-साथ स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर किया जाए। महाशिवरात्रि का व्रत कठोर उपवास की श्रेणी में आता है, इसलिए यह हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता।

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को बरतनी चाहिए सावधानी

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को अपने स्वास्थ्य और शिशु के पोषण का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस अवस्था में शरीर को अधिक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। ऐसे में निर्जला या कठोर व्रत रखने से कमजोरी, चक्कर या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। यदि महिला महाशिवरात्रि पर उपवास करना चाहती है, तो डॉक्टर की सलाह लेकर फलाहार या हल्का सात्विक भोजन कर सकती है।

गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए व्रत जोखिम भरा

डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, किडनी की समस्या या अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को महाशिवरात्रि का व्रत रखने से बचना चाहिए। लंबे समय तक भूखा रहने से उनकी तबीयत बिगड़ सकती है। बुजुर्गों के लिए भी यह व्रत कठिन हो सकता है। यदि कोई बीमार व्यक्ति व्रत रखना चाहता है, तो पहले डॉक्टर की सलाह लेना अनिवार्य है।

मासिक धर्म के दौरान पूजा को लेकर मान्यताएं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान महिलाएं शिवलिंग को स्पर्श कर पूजा नहीं करती हैं। हालांकि, वे इस दौरान व्रत रख सकती हैं और मानसिक रूप से मंत्र जाप, ध्यान और भक्ति कर सकती हैं। भगवान शिव की आराधना भाव से की जाती है, इसलिए शारीरिक पूजा के बिना भी भक्ति संभव है।

व्रत न रख पाने पर भी मिलती है शिव कृपा

शास्त्रों में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति विषम परिस्थितियों या स्वास्थ्य कारणों से व्रत नहीं रख पाता है, तो उसे दोषी नहीं माना जाता। ऐसे श्रद्धालु शिव पूजा, मंत्र जाप, दान-पुण्य, सेवा और सात्विक भोजन के माध्यम से भी भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। सच्ची भक्ति और श्रद्धा ही शिव आराधना का मूल आधार है।