पंचायती राज चुनाव की तैयारी तेज: प्रशासन हुआ सक्रिय
पंचायती राज चुनावों की तैयारियों को लेकर निर्वाचन विभाग ने गतिविधियां तेज कर दी हैं। जैसे ही चुनाव प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत हुई है, वैसे ही शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की चुनावी ड्यूटी लगनी शुरू हो गई है। इसका सीधा असर अब शैक्षणिक व्यवस्थाओं पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि आगामी 12 फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं भी शुरू होने जा रही हैं।
बोर्ड परीक्षाओं से पहले शिक्षकों की ड्यूटी चिंता का कारण
चुनावी ड्यूटी में बड़ी संख्या में सरकारी शिक्षकों की तैनाती की जाती है। ऐसे में बोर्ड परीक्षाओं के दौरान परीक्षा केंद्रों पर शिक्षकों की कमी हो सकती है। शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, चुनावी जिम्मेदारियों के चलते कई अनुभवी शिक्षक परीक्षा कार्यों से दूर हो सकते हैं, जिससे परीक्षा संचालन प्रभावित होने की संभावना है।
शिक्षा विभाग से कर्मचारियों का डाटा जुटाया जा रहा
निर्वाचन अधिकारी ने पंचायती राज चुनाव के लिए शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों का विस्तृत डाटा जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत फिलहाल एक सहायक और दो शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है, जो शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची तैयार करेंगे। इसी सूची के आधार पर आगे चलकर शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी निर्धारित की जाएगी।
अप्रैल तक चुनाव कराने का मिला समय
गौरतलब है कि अदालत ने सरकार को पंचायती राज चुनाव संपन्न कराने के लिए अप्रैल तक का समय दिया है। ऐसे में निर्वाचन विभाग पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में जुटा हुआ है। इसी कारण अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं, ताकि बाद में किसी तरह की प्रशासनिक परेशानी न हो।
मतदान दलों के गठन की प्रक्रिया शुरू
निर्वाचन विभाग की ओर से मतदान से पहले मतदान दलों की सूची तैयार करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसके तहत मतदान दलों के गठन की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है। प्रत्येक मतदान दल में पीठासीन अधिकारी, मतदान अधिकारी और अन्य सहायक कर्मचारी शामिल होंगे, जिनमें बड़ी संख्या में शिक्षक भी तैनात किए जाते हैं।
दो चरणों में होगा मतदान दलों का प्रशिक्षण
मतदान दलों को चुनाव प्रक्रिया से परिचित कराने के लिए दो चरणों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहले चरण के प्रशिक्षण में पंचायत वृत्त के लिए नियुक्त रिटर्निंग अधिकारी के साथ अतिरिक्त मतदान अधिकारी और सहायक मतदान अधिकारी प्रथम को शामिल किया जाएगा। इस प्रशिक्षण में चुनाव से जुड़ी तकनीकी और कानूनी जानकारियां दी जाएंगी।
दूसरा प्रशिक्षण मतदान दलों की रवानगी के दिन आयोजित किया जाएगा, जिसमें दल के सभी सदस्यों को शामिल किया जाएगा। इस दौरान ईवीएम संचालन, मतदान प्रक्रिया और आपात स्थितियों से निपटने की जानकारी दी जाएगी।
जरूरत पड़ने पर मिलेगा अतिरिक्त प्रशिक्षण
यदि जिला निर्वाचन अधिकारी को अतिरिक्त प्रशिक्षण की आवश्यकता महसूस होती है या पहले प्रशिक्षण में कुछ अधिकारियों को शामिल करना जरूरी होता है, तो निर्वाचन आयोग की अनुमति से अतिरिक्त प्रशिक्षण आयोजित किया जा सकेगा। बताया जा रहा है कि फरवरी के पहले सप्ताह में सभी उपखंड अधिकारियों और मास्टर ट्रेनर्स के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
शिक्षा और चुनावी व्यवस्था में संतुलन की चुनौती
एक ओर जहां पंचायती राज चुनाव लोकतंत्र के लिए जरूरी हैं, वहीं दूसरी ओर बोर्ड परीक्षाएं भी छात्रों के भविष्य से जुड़ी अहम प्रक्रिया हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा और चुनावी व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी, ताकि न तो चुनाव प्रभावित हों और न ही छात्रों की परीक्षाएं।