वसुंधरा राजे का बड़ा बयान: राजनीति में दिल तोड़े भी जाते हैं और दुखाए भी जाते हैं
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राजनीति और नैतिकता को लेकर एक अहम और भावनात्मक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राजनीति में केवल फैसले ही नहीं होते, बल्कि कई बार लोगों के दिल भी टूटते हैं और दुखाए जाते हैं। उनका यह बयान 26 जनवरी को सीकर जिले के छोटी खाटू में आयोजित आचार्य महाश्रमण मर्यादा महोत्सव कार्यक्रम के दौरान सामने आया, जहां वे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुई थीं। इस अवसर पर उन्होंने जैन धर्म की अहिंसा की परंपरा का उल्लेख करते हुए राजनीति के नैतिक पहलुओं पर खुलकर बात की।
अहिंसा सिर्फ शारीरिक नहीं, भावनात्मक भी होती है
वसुंधरा राजे ने अपने संबोधन में कहा कि जैन धर्म पूरी तरह अहिंसा पर आधारित है। आमतौर पर लोग हिंसा को केवल हथियार उठाने या किसी को शारीरिक नुकसान पहुंचाने से जोड़कर देखते हैं, लेकिन असल में हिंसा का दायरा इससे कहीं व्यापक है। उन्होंने कहा कि किसी का दिल दुखाना, किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना या किसी के आत्मसम्मान को ठुकराना भी हिंसा की ही श्रेणी में आता है। राजनीति में अक्सर ऐसे हालात बनते हैं, जहां निर्णय लेते समय किसी न किसी का मन आहत होता है, और यही सबसे बड़ी चुनौती है।
राजनीति में नैतिक मूल्यों की जरूरत
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति में रहते हुए सत्ता, पद और फायदे से ज्यादा जरूरी नैतिक मूल्यों को बनाए रखना है। उन्होंने अपनी मां स्वर्गीय विजया राजे सिंधिया का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने जीवन में हमेशा यही सिखाया कि किसी का मन आहत न हो। वसुंधरा राजे ने कहा कि वे आज भी उसी सीख को अपने जीवन और सार्वजनिक व्यवहार में अपनाने की कोशिश करती हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसी के साथ अन्याय करना और किसी का हक छीनना भी अधर्म है, चाहे वह किसी भी परिस्थिति में क्यों न किया जाए।
ईश्वर स्मरण से जीवन में आएगी शांति
कार्यक्रम के दौरान वसुंधरा राजे ने आज की भागदौड़ भरी जिंदगी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज लोगों के पास खुद के लिए और आध्यात्मिक चिंतन के लिए समय नहीं है। अगर इंसान रोज थोड़ा समय निकालकर भगवान का स्मरण करे, तो जीवन की कई कठिनाइयां अपने आप आसान हो सकती हैं। उनका मानना है कि आध्यात्मिकता से व्यक्ति के भीतर संयम, धैर्य और सकारात्मक सोच विकसित होती है, जो व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन दोनों के लिए जरूरी है।
आचार्य महाश्रमण का संदेश
इस अवसर पर जैन संत आचार्य महाश्रमण ने भी लोगों को नैतिकता, सद्भावना और नशा मुक्ति का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के जीवन में नैतिक मूल्यों का होना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही समाज को सही दिशा देते हैं। उन्होंने नशे को समाज की बड़ी बुराई बताते हुए इससे दूर रहने की अपील की।
महिलाओं की राजनीति में चुनौतियों पर पहले भी बोली थीं राजे
गौरतलब है कि इससे पहले 24 जनवरी को जयपुर के संविधान क्लब में आयोजित जाट महिला शक्ति संगम कार्यक्रम में भी वसुंधरा राजे ने राजनीति में महिलाओं की स्थिति पर खुलकर बात की थी। उन्होंने कहा था कि महिलाओं को राजनीति में अपनी जगह बनाने के लिए पुरुषों की तुलना में तीन गुना ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि महिलाओं ने काफी प्रगति की है, लेकिन बराबरी की भागीदारी हासिल करने के लिए अभी लंबा सफर तय करना बाकी है।