30 की उम्र में हाई बीपी: क्या यह सामान्य है या किसी बड़े खतरे की चेतावनी?
एक समय था जब हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन को उम्र बढ़ने के साथ जुड़ी बीमारी माना जाता था। आम धारणा यही थी कि यह समस्या 50 या 60 साल की उम्र के बाद ही होती है। लेकिन बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव ने इस सोच को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है। आज की सच्चाई यह है कि 20 से 30 साल की उम्र के युवा भी हाई बीपी की चपेट में आ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि इनमें से बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्हें यह तक पता नहीं होता कि उनका ब्लड प्रेशर सामान्य से ज्यादा हो चुका है।
हाई बीपी क्यों कहलाता है साइलेंट किलर
हाई ब्लड प्रेशर को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है, क्योंकि यह बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर के अंदर धीरे-धीरे नुकसान करता रहता है। शुरुआत में न दर्द होता है, न कोई खास परेशानी महसूस होती है। लेकिन जब इसके लक्षण सामने आते हैं, तब तक यह दिल, दिमाग, किडनी और आंखों जैसे अहम अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा चुका होता है। यही वजह है कि कम उम्र में हाई बीपी को हल्के में लेना बेहद खतरनाक हो सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर क्या होता है
ब्लड प्रेशर वह दबाव है, जिससे खून हमारी धमनियों की दीवारों पर बहता है। इसकी रीडिंग दो अंकों में होती है। पहला सिस्टोलिक प्रेशर होता है, जो तब मापा जाता है जब दिल खून को पंप करता है। दूसरा डायस्टोलिक प्रेशर होता है, जो दिल के आराम की स्थिति को दर्शाता है। सामान्य तौर पर अगर सिस्टोलिक बीपी 140 mmHg या उससे ज्यादा और डायस्टोलिक बीपी 90 mmHg या उससे ज्यादा रहता है, तो इसे हाई ब्लड प्रेशर माना जाता है।
क्या 30 की उम्र में हाई बीपी को नॉर्मल माना जा सकता है
30 की उम्र में हाई बीपी को बिल्कुल भी सामान्य नहीं माना जाता। यह इस बात का संकेत है कि शरीर के अंदर कुछ गड़बड़ चल रही है और जीवनशैली सही दिशा में नहीं है। कम उम्र में बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर भविष्य में हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेलियर और आंखों की रोशनी पर बुरा असर डाल सकता है। इसलिए 30 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक से दो बार अपना ब्लड प्रेशर जरूर चेक कराना चाहिए। अगर परिवार में हाई बीपी या दिल की बीमारी की हिस्ट्री है, तो और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है।
कम उम्र में हाई बीपी क्यों बढ़ रहा है
डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, युवाओं में हाई बीपी बढ़ने की सबसे बड़ी वजह आधुनिक जीवनशैली है। घंटों मोबाइल और लैपटॉप पर काम करना, देर रात तक जागना और पूरी नींद न लेना अब आम बात हो गई है। शारीरिक गतिविधि की कमी से शरीर सुस्त हो जाता है और दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इसके अलावा करियर का दबाव, नौकरी की अनिश्चितता, पैसों की चिंता और रिश्तों की उलझनें लगातार तनाव पैदा करती हैं। लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर में ऐसे हार्मोन निकलते हैं, जो ब्लड प्रेशर को बढ़ा देते हैं।
खानपान और आदतों का असर
आज का खानपान भी हाई बीपी के लिए जिम्मेदार है। ज्यादा नमक, तेल, फास्ट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स और मीठे ड्रिंक्स का सेवन धीरे-धीरे ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है। वजन बढ़ने से दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे बीपी बढ़ने लगता है। खासतौर पर पेट की चर्बी हाई ब्लड प्रेशर का बड़ा संकेत मानी जाती है। सिगरेट, तंबाकू और अत्यधिक शराब धमनियों को सख्त कर देते हैं, जिससे कम उम्र में ही बीपी बढ़ने की समस्या सामने आने लगती है।
समय पर जांच और सावधानी है जरूरी
30 की उम्र में हाई बीपी को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। समय पर जांच, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पूरी नींद और तनाव को कंट्रोल करके इस समस्या से बचा जा सकता है। सही समय पर सतर्कता बरतने से हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।